पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार देशद्रोह के आरोपी जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार के बचाव में खुल कर उतर गए हैं। सोमवार को जनता दरबार के बाद नीतीश ने कहा कि मैं ‘कन्हैया जी’ से मिल चुका हूं।
उन्होंने कुछ मुद्दों पर देश में लोगों से मिल रहे थे। मुझसे भी मिलने आए थे। मेरा मानना है कि वे लोकतंत्र में आस्था रखने वाले युवा हैं। मेरी समझ से ऐसे युवा पर आरोप लगा देना...इट्स टू मच। बिहार में महागठबंधन की सरकार में जनता दरबार तो तीसरा बार लगा था लेकिन नीतीश ने पहली बार मीडिया से बात करने में दिलचस्पी दिखाई। उन्होंने जेएनयू विवाद के लिए सीधे तौर पर आरएसएस और एबीवीपी जिम्मेदार ठहराया।
नीतीश ने कहा कि मैंने केंद्रीय गृह मंत्री का बयान देखा है। अगर उनके पास कोई प्रमाण है तो पेश करें। पूरे देश में बहस चल रही है। यह कहने से काम नहीं चलेगा कि सबूत अदालत में पेश करेंगे। बगैर प्रमाण देश के बाहर की ताकतों के साथ किसी का नाम जोड़ना गलत है। वामपंथ से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इन दलों को कोई भी देशद्रोही नहीं कह सकता हैं।
जेएनयू में आरएसएस और एबीवीपी के इशारे पर ही यह सबकुछ हो रहा है। एक तरफ राम माधव जम्मू कश्मीर में सरकार बनाने के लिए उन विधायकों से मुलाकात करते हैं जो वहां की विधानसभा में अफजल के समर्थन में प्रस्ताव लाते रहे हैं। और दूसरी ओर देशद्रोह का मुकदमा करते हैं।
जब जैसा- तब तैसा की नीति देश में नहीं चल सकती है। केंद्र सरकार ने आर्थिक मोर्चे पर अपनी विफलता को छुपाने के लिए केंद्र सरकार ने जेएनयू का मामला उठाया है। केंद्र सरकार जेएनयू को बर्बाद करने पर तुली है। जेएनयू को बदनाम करने की साजिश की जा रही है।