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5 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में मंगलवार को स्टूडेंट्स के बीच टकराव देखने को मिला। एक ग्रुप ने संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु और जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के को-फाउंडर मकबूल भट की याद में प्रोग्राम ऑर्गनाइज किया था। इसका कुछ स्टूडेंट्स ने विरोध किया। विवाद बढ़ने पर पुलिस बुलानी पड़ी। इजाजत देने के बाद वापस क्यों लेनी पड़ी...
- इस प्रोग्राम को ऑर्गनाइज करने की पहले इजाजत मिल गई थी। लेकिन एबीवीपी ने इसके खिलाफ यूनिवर्सिटी के वीसी एम जगदीश कुमार के पास शिकायत की।
- इसके बाद जेएनयू एडमिनिस्ट्रेशन ने परमिशन वापस ले ली।
- प्रोग्राम साबरमती हॉस्टल के सामने मंगलवार शाम 5 बजे से रखा गया।
- टेंशन तब बढ़नी शुरू हुई, जब परमिशन कैंसल करने के बावजूद प्रोग्राम हुआ। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया।
- प्रोग्राम होने से नाराज एबीवीपी ने बुधवार को जेएनयू में बंद की घोषणा की है।
- बता दें कि अफजल को 9 फरवरी, 2013 और मकबूल भट को 11 फरवरी, 1984 को फांसी दी गई थी।
किसके चलते हुआ विवाद?

- प्रोग्राम को ‘द कंट्री विदाउट ए पोस्ट ऑफिस’ का नाम दिया गया था।
- इसके पोस्टर पर लिखा गया था, ‘डेमोक्रेटिक राइट-सेल्फ डिटरमिनेशन के लिए कश्मीरी लोगों के संघर्ष के साथ एकजुटता में।'
- एक पोस्टर में लिखा था, 'अफजल और मकबूल की ज्यूडिशियल किलिंग के खिलाफ।'
- इस पर एबीवीपी ने आपत्ति जताई थी।
क्या कहना है वीसी का?
- जगदीश कुमार के मुताबिक, "यूनिवर्सिटी के वीसी के होने के नाते यह मेरी रिस्पॉन्सिबिलिटी है कि कैम्पस में शांति बनी रहे।"
- "अफसरों ने मीटिंग कर यह फैसला लिया कि इस इवेंट की इजाजत नहीं दी जा सकती। हमने ऑर्गनाइजर्स को भी बताया था कि प्रोग्राम की परमिशन कैंसल कर दी गई है।"
पुलिस ने क्या कहा?
- वसंत कुंज पुलिस स्टेशन के एसएचओ के मुताबिक, "जेएनयू एडमिनिस्ट्रेशन ने हमें इन्फॉर्म किया था कि यूनिवर्सिटी में एक कॉन्ट्रोवर्शियल मुद्दे को लेकर अलग-अलग स्टूडेंट्स के दो गुटों बीच टकराव हो सकता है। इसी के चलते पुलिस कैम्पस में मौजूद थी।"
- "कैम्पस में कोई घटना नहीं हुई, लेकिन पुलिस ने सावधानी बरतते हुए सारी तैयारियां कर ली थीं।"
क्या कहना है स्टूडेंट लीडर्स का?
- जेएनयू स्टूडेंट यूनियन (जेएसयूएसयू) के ज्वाइंट सेक्रेटरी सौरभ कुमार शर्मा ने कहा, "परमिशन रद्द कर देने के बावजूद यह इवेंट हुआ। न केवल साबरमती हॉस्टल के बाहर प्रोटेस्ट हुआ, बल्कि गंगा ढाबे तक मार्च भी निकाला गया।"
- जेएनयूएसयू के प्रेसिडेंट और आइसा लीडर कन्हैया कुमार के मुताबिक, "लेफ्ट ऑर्गनाइजेशन फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के अधिकार को छीनने के खिलाफ है, इसलिए हमने प्रोग्राम को सपोर्ट किया।"
- कन्हैया के मुताबिक, "एडमिनिस्ट्रेशन ने लास्ट मोमेंट पर ऑर्गनाइजर्स को बताया कि परमिशन कैंसल कर दी गई है। ऑर्गनाइजर्स ने भी वक्त पर जानकारी न मिलने की बात कही थी।"
- इस पर एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने कहा कि यहां न तो पुलिस थी और न ही कोई गार्ड था।
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