पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
(फाइल फोटो: प्रशांत भूषण)
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई डायरेक्‍टर रंजीत सिन्हा पर 2जी घोटाले के आरोपियों को बचाने का आरोप लगाने वाले वकील प्रशांत भूषण को सोमवार को निर्देश दिया कि वह उस व्हिसल ब्लोअर का नाम उजागर करें जिनसे उन्होंने सिन्हा के आवास की विज‍िटर्स डायरी और सीबीआई दस्तावेज हासिल किए।
न्यायमूर्ति एच एल दत्तू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने भूषण से कहा कि वह सुनवाई की अगली तारीख पर मुहरबंद लिफाफे में व्हिसल ब्लोअर का नाम बताएं जिससे उन्हें दस्तावेज मिले।
शीर्ष अदालत ने कहा कि सूचना के स्रोत की जानकारी मिलने के बाद वह आरोपों के गुण-दोष पर गौर करेगी क्योंकि इससे सीबीआई निदेशक की प्रतिष्ठा के साथ ही टूजी घोटाले के मुकदमे की सुनवाई भी प्रभावित हो सकती है।
न्यायालय ने कहा कि भूषण ने जो हलफनामा दाखिल किया है वह उच्चतम न्यायालय की नियमावली के अनुरूप नहीं है। न्यायालय ने उनसे उस स्रोत का नाम उजागर करने के लिए कहा जिससे उन्हें ये तमाम दस्तावेज मिले हैं।
सीबीआई निदेशक ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष डायरी के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगाया और कहा कि कुछ प्रविष्ठियां सही हो सकती हैं लेकिन 90 फीसद प्रविष्ठियां गड़बड़ हैं।
जांच ब्यूरो के निदेशक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा,ऐसा लगता है कि इस मामले की कार्यवाही को कोई और नियंत्रित कर रहा है। उन्होंने सवाल किया कि एक मीडिया समूह ने पहले ही यह खबर कैसे प्रकाशित कर दी कि भूषण शीर्ष अदालत में आगंतुकों की मूल सूची पेश करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि एक कार्पोरेट घराना इस सारे विवाद के पीछे है और इसका मकसद 2जी मामले के आरोपियों को लाभ पहुंचाना है।
न्यायालय इस विवाद पर सीबीआई का दृष्टिकोण भी जानना चाहता था लेकिन उसके वरिष्ठ अधिवक्ता के के वेणुगोपाल ने इसमें शामिल होने से इनकार करते हुए कहा कि यह प्रशांत भूषण और जांच एजेन्सी के निदेशक के बीच का मामला है।
इसके बाद न्यायालय ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि जांच ब्यूरो के निदेशक के सारे दस्तावेज और हलफनामे सीलबंद लिफाफे में रखकर सेक्रेटरी जनरल के पास सुरक्षित रखवा दिये जाए। न्यायालय अब इस मामले में 22 सितंबर को आगे सुनवाई करेगा।