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7 वर्ष पहले
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(फाइल फोटो: दिल्ली हाई कोर्ट)
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया जिसमें राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव के बाद सत्ता के लिए गठबंधन किए जाने के चलन का विरोध करते हुए कहा गया था कि मतदान के समय इसके बारे में मतदाताओं को अंधेरे में रखा जाता है।
मुख्य न्यायमूर्ति जी रोहिणी और न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ की पीठ ने कहा 'याचिका खारिज की जाती है।‘ इस मुद्दे पर उच्च न्यायालय ने अपना फैसला 10 सितंबर को सुरक्षित रख लिया था।
अधिवक्ता मिथिलेश कुमार पांडेय द्वारा दायर इस याचिका में राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव पश्चात गठबंधनों की वैधता को चुनौती दी गई थी। याचिका में तर्क दिया गया था कि चुनाव पश्चात गठबंधन, राजनीतिक दलों द्वारा प्रचार के दौरान किए गए वादों का उल्लंघन है।
पूर्व में अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल एएसजी संजय जैन ने कहा था कि कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल हैं और अक्सर सरकार बनाने के लिए ऐसा गठबंधन करना पड़ता है क्योंकि किसी एक दल को पूर्ण बहुमत प्राप्त होने तक बार-बार चुनाव कराना व्यवहारिक नहीं होगा।
एएसजी ने कहा, 'हम तुरंत चुनाव नहीं करवा सकते।‘उन्होंने यह भी कहा, 'चुनाव घोषणापत्रों में किए गए वादों को केवल एक सीमा तक ही पूरा किया जाना संभव है।‘ जैन ने कहा कि भविष्य में, ' जब हमारा लोकतंत्र अधिक परिपक्व होगा तो हो सकता है कि हम इस प्रकार के चुनाव सुधार करने में सक्षम हों सकें।’
याचिकाकर्ता पांडे ने हालांकि यह भी कहा कि चुनाव घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा किया जाना चाहिए अन्यथा यह विश्वासघात होगा। उनकी जनहित याचिका में मांग की गई थी कि एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव के बाद गठबंधन करने के चलन को असंवैधानिक घोषित करने का आदेश दिया जाए।
याचिका में कहा गया था, 'राजनीतिक दल जब चुनाव के पश्चात सरकार बनाने के लिए गठबंधन करते हैं तो उन्हें अपने ही घोषणापत्रों का उल्लंघन करने से रोकने का आदेश दिया जाए।‘ इसमें यह भी कहा गया था कि संबद्ध प्राधिकारी को आदेश दिया जाए कि वह घोषणापत्र को कानूनी तौर पर पालन करने वाला दस्तावेज बनाने के लिए कदम उठाए।