(फोटो:शिखर वार्ता के बाद मीडिया से रूबरू होते चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और नरेंद्र मोदी)
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शिखर वार्ता के बाद दोनों देशों ने एक साझा बयान जारी किया है। जिसमें बताया गया है कि भारत और चीन के बीच 12 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं।
इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले दो दिनों में अहमदाबाद और दिल्ली में हमें भारत और चीन के संबंधों में हर विषय पर बातचीत करने का मौका मिला। जैसे राजनीतिक और सुरक्षा के मुद्दे, आर्थिक संबंध और लोगों के बीच संपर्क।
बनेंगे दो चाइनीज इंड्रस्ट्रीयल पार्क
पीएम ने कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि आज भारत में दो चाइनीज इंड्रस्ट्रीयल पार्क पर बनाने पर समझौता हुआ है। और उन्होंने पाँच साल में 20 बीलियन डॉलर्स की चाइनीज इनवेस्टमेंट कराने का वादा भी किया है। यह आर्थिक संबंधों का एक नया अध्याय है। साथ ही पीएम ने बताया कि रेलवे के क्षेत्र में हमने आज सहयोग के कुछ ठोस निर्णय लिए हैं।
अमरनाथ के लिए नया रास्ता
नरेंद्र मोदी ने कहा कि वह भारत के सभी लोगों की तरफ से चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का इस बात के लिए आभार प्रकट करता हूं कि उन्होंने कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नाथुला से एक नया रास्ता खोलने की अनुमति दी है। यह नया रास्ता उत्तराखण्ड के रास्ते के अतिरिक्त होगा। नाथुला के रास्ते से कई सुविधाएं हैं। मोटर से कैलाश मानसरोवर तक यात्रा की जा सकती है, इससे विशेषकर बूढ़े तीर्थयात्रियों को लाभ होगा। तीर्थयात्रा कम समय में पूरी की जा सकेगी और अब भारत से काफी मात्रा में तीर्थयात्री कैलाश मानसरोवर जा सकते हैं। कई मायनों में यह नया रास्ता बरसात के मौसम में सुरक्षित भी होगा।
जिन 12 समझौतों पर दस्तखत हुए हैं उनमें पंचवर्षीय आर्थिक एवं व्यापार विकास योजना, दृश्य-श्रवण सह-उत्पादन को लेकर सहमति, दवा प्रशासन एवं सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर सहमति, बाहरी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोगों पर सहयोग, सीमाशुल्क मामलों में परस्पर सहयोग पर सहमति, शंघाई और मुंबई को 'ट्विन सिटी' बनाने पर सहमति।
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का धन्यवाद करते हुए भारत के प्रति भी आभार व्यक्त किया तथा वर्ष 2015 की शुरुआत में पीएम मोदी को चीन यात्रा के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत और चीन सीमा से जुड़े विवाद को जल्द सुलझा लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और चीन मिलकर आर्थिक कॉरिडोर पर काम करेंगे।
कठिन विषयों पर भी हुई बात
प्रधानमंत्री ने साफ किया कि दोनों पक्षों के बीच कुछ कठिन विषयों पर भी खुलकर बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि मैंने सीमा पर जो घटनाएं हुई हैं उस पर चिंता प्रकट की है। और कहा है कि इन्हें सुलझाना आवश्यक है। हम इस बात पर सहमत हैं कि सीमा क्षेत्र में शांति और स्थिरता हमारे आपसी विश्वास और संबंधों की नींव है। यह दो देशों की एक महत्वपूर्ण सहमति है और इसका दृढ़ता से पालन किया जाना चाहिए।
चीनी राष्ट्रपति का विरोध
इससे पहले आज चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का विरोध
हैदराबाद हाउस तक पहुंच गया। तिब्बती समर्थक सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए हैदराबाद हाउस तक पहुंच गए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। ये लोग हाउस के तीन नंबर गेट तक जा पहुंचे और वी वांट जस्टिस के नारे लगा रहे थे। पुलिस ने सभी को धकेलकर प्रदर्शनकारियों को जबरन बसों में भरा और हिरासत में ले लिया। सभी को थाने ले जाया गया है। प्रदर्शनकारियों में ज्यादातर युवा लड़कियां हैं।
इससे पहले जिनपिंग हैदराबाद हाउस पहुंचे, जहां पीएम नरेंद्र और मोदी शी जिनपंग के साथ द्विपक्षीय बातचीत चल रही है। इससे पहले सुबह 9 बजे शी का राष्ट्रपति भवन में पारंपरिक स्वागत किया गया। यहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। जिसके बाद शी ने कैबिनेट के सभी मंत्रियों से हाथ मिलाया।
राष्ट्रपति भवन से चीनी राष्ट्रपति अपनी पत्नी पेंग लीयुआन के साथ राजघाट पहुंचें जहां उन्होंने महात्मा गांधी की समाधि पर फूल चढाएं। हैदराबाद हाउस में वाली मुलाकात के दौरान भारत और चीन के बीच कारोबारी समझौते पर चर्चा होगी। बताया जा रहा है कि करार में रेलवे पर खास जोर होगा. हाईस्पीड ट्रेन चलाने के लिए पटरियों से लेकर, रेलवे के विद्युतीकरण में पड़ोसी मुल्क निवेश का ऐलान कर सकता है। इसके साथ ही पुणे और अहमदाबाद में लॉजिस्टिक पार्क बनाने में भी चीन मदद कर सकता है।
तस्वीरों में आगे देखिए चीनी राष्ट्रपति के दौरे का दूसरा दिन तिब्बती लोगों का विरोध प्रदर्शन।
विरोध प्रदर्शन की सभी फोटो - भूपिंदर सिंह।