पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
(फाइल फोटो: अमित शाह, उद्दव ठाकरे)
नई दिल्ली। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी और शिवसेना के बीच खींचतान खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। ऐसा लग रहा है कि दोनों दल अपने-अपने रुख पर अड़ गए हैं। जहां शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने आज बीजेपी को अपना आतिंम फार्मूला बता दिया वहीं बीजेपी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह साफ कर दिया कि वह इस फार्मूले से खुश नहीं है।
गौरतलब है कि मुंबई में आज शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा को अंतिम प्रस्ताव दिया जिसके तहत शिवसेना को 151, बीजेपी को 119 और अन्य सहयोगी दलों को 18 सीटें मिलनी चाहिए। इस मौके पर उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को याद दिलाया कि शिवसेना के दिवंगत प्रमुख बाल ठाकरे ने 2002 के गुजरात दंगों के बाद उनका समर्थन किया था।
उन्होंने कहा, 'महायुति विपक्षी दलों का गठबंधन को बरकरार रखने के लिए आज मैं अंतिम प्रयास कर रहा हूं। शिवसेना पहले 160 सीट चाहती थी। लेकिन आज हम नौ और सीट छोड़ने को तैयार हैं। शिवसेना 151 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और 119 सीटें भाजपा के लिए छोड़ेगी। शेष 18 सीट हमारे सहयोगी दलों को दी जाएंगी। पार्टी की राज्य कार्यकारिणी के बाद आज सुबह पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करने वाले उद्धव ने कहा, 'मैं इससे और आगे नहीं बढ़ सकता।’
इसके कुछ ही देर बाद दिल्ली पहुंचे महाराष्ट्र के बीजेपी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह कहा कि गठबंधन में कोई आखिरी प्रस्ताव नहीं होता और बीजेपी इस प्रस्ताव से खुश नहीं है। इसके साथ ही बीजेपी नेताओं ने कहा कि गठबंधन की बातें आमने-सामने होनी चाहिए टीवी के माध्यम से नहीं। पार्टी ने उम्मीद जताई कि विवाद आपस में सुलझा लिया जाएगा।
महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता एकनाथ खडसे और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष विनोद तावड़े ने सावधानी बरतते हुए यहां प्रतिक्रिया दी कि पार्टी चाहती है कि शिवसेना उन सीटों पर फिर से विचार करे, जिन पर वह पिछले 25 साल में कभी नहीं जीत सकी ताकि आगामी चुनावों में राकांपा-कांग्रेस गठबंधन को फायदा नहीं मिल जाए।
तावड़े ने संवाददाता सम्मेलन में कहा,'भाजपा गठबंधन बनने के बाद से 119 सीटों पर चुनाव लड़ती रही है, इसलिए शिवसेना के ताजा प्रस्ताव में कुछ नया नहीं है। हम चाहते हैं कि गठबंधन बना रहे। गठबंधन को बनाए रखना शिवसेना और भाजपा दोनों की जिम्मेदारी है।’
खड़से ने कहा, 'शिवसेना 35 सीटों पर हारती रही है और हमें 19 पर पराजय का सामना करना पड़ा है। अगर इन पर फिर से विचार किया जाए तो हमें फायदा होगा और ये सीटें खुद ब खुद कांग्रेस-राकांपा गठबंधन के खाते में नहीं जाएंगी।
उन्होंने कहा, 'पिछले चुनाव में इनमें से कई सीटों पर मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा है। 135 सीटों के प्रस्ताव के पीछे यही सोच है। हालांकि भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि वे अपनी पिछली मांग से पांच सीटें कम यानी 130 सीटें भी मंजूर करने को तैयार हैं।