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7 वर्ष पहले
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(फोटो: अरविंद केजरीवाल और पीएम मोदी)
नई दिल्‍ली। आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बीजेपी में सांप्रदायिकता और सरकार में भ्रष्टाचार पर ध्यान देने की मांग की है।
बीजेपी नेता आपकी बात नहीं मानते: केजरीवाल
मोदी को आज लिखे पत्र में केजरीवाल ने कहा है कि सरकार के 4 महीने पूरे हुए। लोगों में इन 4 महीनों की खूब चर्चा है। लोगों की भावनाओं को इस पत्र के जरिए मैं बयान कर रहा हूं। पत्र में लिखा है कि लोगों का मानना है कि प्रधानमंत्री बहुत अच्छा बोलते और भाषण देते हैं, लेकिन भाजपा के नेता और मंत्री आपकी बातों के ठीक विपरीत काम कर रहे हैं। आप उस पर न कुछ कहते हैं और न ही कुछ करते हैं। इससे लोगों में असमंजस है।
धर्मों के बीच जहर घोल रहे हैं आपके सांसद आदित्‍यनाथ
केजरीवाल ने प्रधानमंत्री के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें अगले 10 सालों तक देश में साम्प्रदायिकता की बातें नहीं होने का जिक्र और साम्प्रदायिकता से किसी का भला नहीं होने का जिक्र था। लोगों को ये बातें बहुत अच्छी लगी, लेकिन लोग तब दंग रह गए जब भाषण के कुछ दिन बाद ही पार्टी के सांसद योगी आदित्यनाथ ने धर्म के नाम पर जहरीले भाषण दिए। पार्टी के लोगों ने लव-जिहाद के नाम पर धर्मों के बीच जहर घोलना शुरू किया। लोगों को आश्चर्य हुआ कि भाजपा के लोग ही प्रधानमंत्री की बातों को क्यों नहीं मान रहे लोगों को उम्मीद थी कि आप योगी आदित्यनाथ को और पार्टी के अन्य लोगों को यह सब करने से रोकेंगे, लेकिन जब आप भी चुप रहें तो लोग असमंजस में पड़ गए।
संजीव चतुर्वेदी को पद से हटाना दुर्भाग्‍यपूर्ण
उन्होंने लिखा है आपने लोगों को भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना दिखाया और यहां तक कहा ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’। सबको यह सुनकर बहुत अच्छा लगा। लोगों में विश्वास जगा कि अब भ्रष्टाचारियों को जेल होगी और ईमानदारों की कद्र होगी, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने एक बेहद ईमानदार अफसर संजीव चतुर्वेदी को पद से हटा दिया तो लोगों को आश्चर्य हुआ। सारा देश जानता है कि किस तरह से चतुर्वेदी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लडाई लड़ी और कई भ्रष्टाचारियों को जेल पहुंचाया। यहां तक कि स्वयं राष्ट्रपति और संसदीय समिति ने भी चतुर्वेदी के काम को सराहा है। लोगों को तो उम्मीद थी कि ऐसे अफसरों को आप पदम भूषण से सम्मानित करेंगे। उनके हटाए जाने का मीडिया और जनता ने कड़ा विरोध किया। लोगों को उम्मीद थी कि आप स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे और उन्हें फिर से बहाल कराएंगे, लेकिन आप इस मामले में भी चुप रहे, तो लोगों को आश्चर्य हुआ।
आगे पढ़िए, केजरीवाल ने पीएम से और क्‍या-क्‍या कहा।