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7 वर्ष पहले
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फोटो: प्रतीकात्‍मक इस्‍तेमाल।
नई दिल्ली। रेलवे अरुणाचल प्रदेश और दिल्‍ली के बीच इस साल नवंबर से राजधानी एक्‍सप्रेस चलाने की तैयारी में है। यात्रियों के लिए सुविधा की बात यह है कि उन्‍हें इनर-लाइन परमिट की जरूरत नहीं होगी। अरुणाचल सरकार परमिट की कठोर शर्तों को आसान बनाने के लिए तैयार हो गई है। दरअसल, राज्‍य में जाने वाले किसी भी बाहरी शख्‍स को परमिट लेनी होती है।
नहीं पड़ेगी परमिट की जरूरत
प्रधानमंत्री कार्यालय में रेलवे और राज्‍य सरकार के अधिकारियों के बीच हुई कई बैठकों और रेलवे बोर्ड तथा राज्य के चीफ सेक्रेटरी के बीच हुए पत्र व्यवहार के बाद यह तय हुआ है कि जो यात्री रिजर्वेशन करवाएंगे, उन्हें परमिट की जरूरत नहीं रह जाएगी। रेलवे का कहना है कि रिजर्वेशन के दौरान यात्री की पहचान से जुड़ी जानकारियां रेलवे सिस्टम में दर्ज हो जाती हैं और यात्रा से पहले उसे वेरिफाई किया जा सकता है। रेलवे बोर्ड के मेंबर (ट्रैफिक) देवी प्रसाद पांडे ने बताया कि राज्य इस बात पर तैयार हो गया है कि जब तक यात्री रिजर्व टिकट को संभाल कर रखेगा, तब तक उसे इनर-लाइन परमिट की जरूरत नहीं रह जाएगी।
हफ्ते में दो बार चलेगी ट्रेन
दिल्ली से अरुणाचल प्रदेश के नहरलागुन के लिए राजधानी एक्सप्रेस हफ्ते में दो बार चलेगी। इसके अलावा गुवाहाटी और इटानगर के बीच एक एसी ट्रेन चलाने की भी योजना है। दोनों ही ट्रेनों में गैर आरक्षित टिकट जारी नहीं किए जाएंगे। वैसी ट्रेनें जिनमें जनरल डिब्‍बे होते हैं और यात्री बिना आरक्षित टिकटों के सफर करते हैं, उन्हें चलाने को लेकर अभी बातचीत नहीं हुई है। रेलवे और राज्‍य सरकार के बीच एक ऐसा होल्डिंग क्षेत्र बनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई है, जहां गैर आरक्षित श्रेणी के यात्रियों से जुड़ी जानकारियों की जांच की जाएगी और उन्‍हें इनर-लाइन परमिट जारी किया जाएगा।
परमिट पर विरोध भी
अरुणाचल ईस्ट लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद निनोंग इरिंग ने रिजर्व टिकट वाले यात्रियों को परमिट जारी करने को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि कैसे एक रिजर्व टिकट इनर-लाइन परमिट की बराबरी कर सकता है? उन्‍होंने कहा, "परमिट सिस्टम को उस नियम के तहत लाया गया था जो स्थानीय लोगों के शोषण को रोकता है। ट्रेन में चढ़ने से पहले इनर-लाइन परमिट हासिल करने में क्या दिक्कत है? मैं नहीं समझता की यह नई व्यवस्था स्वीकार्य होगी।"