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7 वर्ष पहले
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(फाइल फोटो : प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल)
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के उप-चुनावों में बीजेपी को मिली करारी हार के बाद भी लव जिहाद का मुद्दा खत्म होने नहीं जा रहा है। अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक्स टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) इस मुद्दे को कथित रूप से ‘महिलाओं के खिलाफ क्रूरता’ के तौर पर उठाने की योजना बना रहा है। एबीवीपी का मानना है कि सबूतों की कमी या फिर उत्तर प्रदेश के मतदाताओं द्वारा नकार दिए जाने के बाद भी यह मुद्दा अप्रासंगिक नहीं हुआ है।
एबीवीपी, हिंदू महिलाओं को उन मुस्लिम मर्दों से बचाने के लिए जो उनको फंसा कर उनका धर्म परिवर्तन करवा देते हैं, देश भर की यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों में एक जागरुकता कैंपेन चलाने की योजना बना रही है।
एबीवीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पी मुरली मनोहर का कहना है, यह एक षड्यंत्र है, आप इसे लव जिहाद का नाम दें या कुछ और, पिछले कुछ समय में ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें आदमियों ने अपने धर्म के बारे में झूठ बोलकर हिंदू लड़कियों से शादी कर ली। हमें इन मामलों की जानकारी है। हमें यकीन है इसके पीछे एक पूरी योजना है।
एबीवीपी के आर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी सुनील अंबेडकर ने कहा, लव जिहाद के मामले केरला, कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में सामने आए हैं। एबीवीपी के कैंपेन का लक्ष्य इस संकट को फैलने से रोकने का है।
हमारी योजना कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में जागरुकता फैलाने की है, हमारी रणनीति ऐसे ग्रुप बनाने की है जो कि छात्राओं से संपर्क करें और उन्हें केरल, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश में हुए लव जिहाद के मामलों की जानकारी दें।
कैडर को कहा गया है कि वे लव जिहादियों पर नजर रखें जिससे की उन्हें रोका जा सके। अंबेडकर ने कहा, हम लड़कों से आग्रह करेंगे कि वे सतर्क रहें और उन लोगों पर नजर रखें जो इस तरह की समस्या पैदा कर सकते हैं।
महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों(जिनमें लव जिहाद भी शामिल है) के विरोध में एबीवीपी 7 अक्टूबर को एक मानव श्रृंखला बनाने जा रही है। पी मुरली मनोहर ने बताया कि, छात्र संगठन इस मसले पर बुकलेट्स और साहित्य भी छात्रों में बांटेगा
क्या राजनाथ सिंह जैसे नेताओं द्वारा अपने आप को लव जिहाद से दूर रखने के कारण एबीवीपी के कैंपेन को नुकसान पहुंचेगा। इस सवाल पर पी मुरली मनोहर ने कहा, हम सब को जानकारी है कि लव जिहाद का अस्तित्व है, मुझे यकीन है उनको भी जानकारी होगी। शायद वह इसे लव जिहाद कहने से हिचक रहे हों? कुछ नेताओं का मानना है कि यह छिट-पुट घटनाएं हैं जिनके पीछे कोई योजना नहीं है, शायद राजनाथ सिंह भी ऐसा मानने वालों में से एक हों।