फाइल फोटो: कोयला खदान।
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक बड़े फैसले में 214 कोयला खदानों का आवंटन रद्द कर दिया। ये सभी खदानें प्राइवेट कंपनियों को आवंटित की गई थीं। देश की सबसे बड़ी अदालत ने कंपनियों को खदानों से अपना कारोबार समेटने के लिए 31 मार्च, 2015 तक का समय दिया है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि खदानों को चालू नहीं करने वाली कंपनियों को नुकसान की भरपाई के रूप में मुआवजा अदा करना होगा। कोर्ट ने सरकारी कंपनियों के चार कोयला खदानों को अवैध ठहराए जाने के बावजूद उनके आवंटन को रद्द नहीं किया। उद्योग जगत के जानकार बताते हैं कि आवंटन रद्द होने से
सबसे ज्यादा नुकसान बैंकों, पावर, इन्फ्रास्ट्रक्चर, माइनिंग और प्राइवेट कोल कंपनियों को होगा।
इसी साल 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 1993 से अभी तक आवंटित किए गए करीब 218 कोयला खदानों को अवैध करार दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में इसी मामले में सुनवाई के दौरान कहा था कि नीलामी व्यवस्था से पहले 1993 से 2010 के बीच एनडीए और यूपीए सरकारों द्वारा किए गए कोयला ब्लाकों के सभी आवंटन गैरकानूनी तरीके से 'तदर्थ और लापरवाही' के साथ बगैर 'दिमाग लगाए' किए गए। कोर्ट की बेंच ने 218 कोयला खदानों के आवंटन की जांच-पड़ताल की थी और कहा था कि 'राष्ट्रीय संपदा के अनुचित तरीके से वितरण की प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता नहीं थी' जिसका खामियाजा लोगों को चुकाना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट कहा था कि पिछले दो दशक में 36 स्क्रीनिंग कमिटियों ने अवैध और मनमाने तरीके से कोल ब्लॉक आवंटित किए।
कोल ब्लॉक का मामला भले मनमोहन सरकार के समय में उछला, लेकिन 1993 से 2010 के बीच आवंटित हुई सभी खदानों की जांच की गई। झारखंड, छतीसगढ़, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और मध्य प्रदेश में 1993 से 2010 के बीच 218 कोल ब्लॉक्स आवंटित हुए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें:
-214 कोल ब्लॉक आवंटन रद्द हुए हैं।
-सिर्फ सरकारी कोल ब्लॉक्स का आवंटन रद्द नहीं होगा।
-यूपीएमपीपी, सेल, एनटीपीसी के कोल ब्लॉक रद्द नहीं होंगे।
-जो कोल ब्लॉक सरकारी कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम में थे, उन्हें रद्द नहीं किया गया।
-सुप्रीम कोर्ट ने कैटेगरी-1 के कोल ब्लॉक को रद्द किया।
-सुप्रीम कोर्ट ने सीएजी के उस अनुमान को भी सही मान लिया है, जिसमें कहा गया था कि कोयला खदानों के चालू न होने की वजह से करीब 1.86 लाख करोड़ रुपए का घाटा हुआ है।
-कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि उसकी टिप्पणियों का इस मामले में चल रही सीबीआई जांच पर कोई असर नहीं होगा।
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