1. बाघ पर पानी की बौछार की जा सकती थी
2. बाड़ में सीढ़ी गिराई जा सकती थी, जिसके जरिए युवक मकसूद बाहर आ सकता था
3. ट्रैंक्विलाइजर गन के जरिए बाघ को बेसुध किया जा सकता था
4. गार्ड और अफसर सक्रिय होते तो बाघ पर ध्यान रखने वाले शख्स (कीपर) को तत्काल बुलाया जा सकता था, जो बाघ को काबू में कर सकता था
5. बाड़ के पास गार्ड का पुख्ता इंतजाम होता तो वह युवक को बाड़ में घुसने या ताक-झांक करने से रोक सकता था
6. बाड़े के पास पानी के लिए बनी खाई भरी होती तो संभव है कि बाघ पानी में जाता और मकसूद को कुछ वक्त मिल सकता था। इस वक्त का इस्तेमाल उसे निकालने में किया जा सकता था।
एक एक्सपर्ट के मुताबिक सिंगापुर, अमेरिका, शिकागो के ब्रुकफील्ड जू और न्यूयार्क के ब्रोन्कस जू में आपात स्थिति के लिए अलार्म सिस्टम और सीढ़ियां होती हैं जिससे आदमी को बचाया सके।
1. कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कीपर्स को निर्देश देने वाले वरिष्ठ अधिकारी मौके पर 15 मिनट बाद पहुंचे।
2. चिडि़याघर प्रशासन का कहना है कि वह हर बाड़/जानवर के पास गार्ड की व्यवस्था नहीं करा सकते। अधिकारियों का कहना है कि 20 जू बीट्स पर सिर्फ एक गार्ड मौजूद रहता है जबकि रियाज खान, क्यूरेटर (एजूकेशन) का कहना है कि हर बीट पर दो से तीन गार्ड होते हैं।
3. रियाज खान का कहना है कि ट्रांक्विलाइजर गन का इस्तेमाल हर कोई नहीं कर सकता। सीजेडए (सेंट्रल जू अथॉरिटी) के नियमों के तहत गार्ड को ट्रांक्विलाइजर गन इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
4. चिडि़याघर में आपात स्थिति की जानकारी देने और उससे निपटने के लिए सक्रिय होने के लिए कोई प्रभावी अलार्म सिस्टम नहीं था।
5. बताया जा रहा है कि प्रत्यक्षदर्शियों ने
शोर कर और पत्थर मार कर बाघ का ध्यान युवक की ओर से हटाने की कोशिश की, लेकिन इसका उल्टा असर हुआ। इससे बाघ ज्यादा आक्रामक हो गया। एक ऐसा ही हादसा चिड़ियाघर में 6 साल पहले हुआ था। तब नशे में धुत्त एक युवक शेरनी के बाड़े में गिर गया था। राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के अधिकारी के मुताबिक, शेरनी ने युवक पर हमला नहीं किया और अधिकारी शेरनी को वापस बाड़े में भेजने में कामयाब रहे थे।
6. चिडि़याघर प्रशासन ने पहले हुए इस तरह के हादसों से सबक लेते हुए इनसे निपटने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं कर रखी थी।