सफर एक खूबसूरत हकीकत है
जिंदगी की एक खुशनुमा जरूरत है
सफर कहो या यात्रा हर एक में नया अनुभव है
सफर वो है जो हर मन में छुपी ख्वाहिश की मंजिल है....
जी हाँ.... अगर सफर या यात्रा की बात की जाए मन खुद ब खुद कविता करने
लगताा है। जब हम किसी यात्रा या सफर के बारे में सोचते हैं ताे उससे जुडे कुछ अनुभव या कहें कुछ मीठी यादें हमें हमेशा गुदगुदाती हैं... वो सफर कहीं का भी हो... आपको एक ऐसा अनछुआ अहसास दे जाता हैं, जो जीवन भर आपको याद रहता हैं।
जब हम किसी यात्रा का वृतान्त लिखने बैठत हैं तो अक्सर हमारे दिमाग में उस
जगह के सुन्दर दृश्य घूमने लगता हैं, कि वहाँ हमने सुन्दर बगीचा देखा, इमारत देखी, झरने देखें, जो कि स्वाभाविक है... लेकिन जब मैं, एक यात्रा पर गई तो उस जगह की सुन्दरता के साथ साथ मेरी नजरों में कुछ और चीजें भी थी... वो जगह है नैनीताल... जहाँ अक्सर सभी लोग जाया करते हैं... प्रकृति की गाेद में बसा नैनीताल हर किसी के मन को भाता हैं ....।
नैनीताल की घाटियों के बीच बने रास्तों से गुजरने का अपना ही एक अनुभव हैं... वहाँ जाकर लगताा है कि प्रकृति के कितने सारे रूप है... नैनी लेक में बोटिंग करते समय अक्सर हमारी निगाह लेक के दाेनाें तरफ बसे घराे की सुन्दर बनावट और हरियाली की सुन्दरता को बढ़ाते ना जाने कितने रंगाें के अद्भुत फूलों पर टिके बिना नहीं रह सकती ।
पर ना जाने क्यों मेरी निगाह और सोच वहाँ के लोगाें पर अधिक केन्द्रित हुई... वहाँ की जिन्दगी आसान नही हैं- रोजमर्रा की चीजों के लिए भी घुमावदार रास्ता पर चढ़ना उतरना पड़ता है, जो कई बार खतरनाक भी हो सकता है... ।
लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत अच्छा है, इसलिए वहां रहने वाले लोग शारीरिक रूप से एकदम फिट दिखाई देते हैं... ।
वहाँ की जिन्दगी में एक सुकून सा है... जो मन से काम करने की ऊर्जा देता हैं... ना भागदौड़... ना धुँआ, ना शोर, बस प्रकृति अपने हरे आँचल में सभी को समेटे हुए नजर आताी हैं... हम जब किसी आैर शहर में जाते हैं तो स्वतः ही उसकी तुलना अपने शहर से करने लगताे हैं... कुछ चीजें हमें अच्छी लगताी हैं ताे कुछ बुरी, पर हम सिर्फ जगह को देखने के उद्देश्य से जाते हैं और मनोरंजन करके लौट आता हैं... जो कि ठीक भी हैं... ।
लेकिन आपको नहीं लगताा कि हम एक नये वातावरण - एक नए अनुभव और एक नई जगह को अपना दोस्त बनाकर लौटते हैं - क्योंकि उस सफर की यादें छप जाती हैं हमारे दिलों दिमाग पर - हम याद ना भी करें, तो भी उस जगह, का नाम सुनते ही- हम तुरन्त बोल पड़ते हैं.... हाँ वहाँ तो मैं गया हूं या गई हूं . नैनीताल के पाँच तालों-तल्लिताल, नौ-कुचिया ताल, सात ताल, भीमताल में बोटिंग करते समय नाव वाला ने आपको भी उन तालों की कहानियां सुनाई होगी... मै नें भी सुनी कहानियां... वो जब कहानी सुनाते हैं तो उनकी आँखाें में एक चमक होती हैं, एक विश्वास हाेता हैं और एक गर्व भी होता है कि हम हमारी जगह के बारे में किसी को बता रहे हैं.... ।
आैर कोई सुन रहा है... आपको नहीं लगताा कि ‘‘कोई सुन रहा हैं’’ इस संतुष्टि के लिए हम जीवन भर तरसते हैं शायद... ना जाने क्यों मुझे लगा कि वो नाव वाला कितना भाग्यशाली हैं कि पूरे दिन में ना जाने कितने लोग उसे बड़े ध्यान से सुनते हैं और इसी संतुष्टि की चमक और अपनी जगह के बारे मैं सब कुछ जानने का आता्मविश्वास उसके चेहरे पर साफ़ नजर आताा हैं ।
लेकिन मेरी नजर में यात्रा का दूसरा नाम एक दोस्ती है... जो जीवन के कुछ पलों
के साथ स्वतः हो जाती हैं आैर वो जीवन भर साथ निभाने के लिए जिन्दगी में ठहर जाते हैं... कुछ इस तरह...
यात्रा से जुड़ी मन की परिभाषा पढ़कर तो देखो
जीवन के कुछ ठहरे पलों से
बातचीत करके तो देखो
उनसे दोस्ती के खुशनुमा एहसास को महसूस करके तो देखो
तस्वीरों में आगे देखिए नैनीताल के नजारे