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7 वर्ष पहले
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(फोटो: देश के 42वें प्रधान न्यायधीश के रूप में शपथ ग्रहण करते एच.एल. दत्तू)
नई दिल्ली। न्यायमूर्ति एच लक्ष्मीनारायणस्वामी दत्तू को आज राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देश के 42वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई। 63 वर्षीय दत्तू ने राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में आयोजित छोटे समारोह में भगवान के नाम पर शपथ ग्रहण की।
समारोह में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, राज्यसभा के उप सभापति पी जे कुरियन, केंद्रीय मंत्रियों राजनाथ सिंह, रविशंकर प्रसाद, एम वेंकैया नायडू, अनंत कुमार और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भाग लिया। कार्यक्रम में भाग लेने वाले वरिष्ठ विपक्षी नेताओं में केवल कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी और राजीव शुक्ला मौजूद थे।
कल प्रधान न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए न्यायमूर्ति आर एम लोढ़ा, उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश, सेवानिवृत्त न्यायाधीश और बार के सदस्य समारोह में उपस्थित थे।
न्यायमूर्ति दत्तू 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में जांच पर निगरानी रख रही पीठ की अगुवाई कर रहे हैं। उनका कार्यकाल 14 महीने का होगा और वह दो दिसंबर, 2015 को सेवानिवृत्त होंगे।
इस महीने की शुरूआत में जब न्यायमूर्ति दत्तू की नियुक्ति से जुड़ी फाइल प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंची थी तो उन्होंने कहा था, 'मैं इस देश के सभी नागरिकों से अनुरोध करूंगा कि मेरी इस संस्था को सर्वोच्च स्थान पर ले जाने के लिए मुझे साहस और विश्वास का आशीर्वाद दें।‘ उन्होंने कहा था, 'मेरा संस्थान दुनिया की सर्वश्रेष्ठ संस्था है।‘
हालांकि उन्होंने उच्च न्यायपालिका के लिए न्यायाधीशों की नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली को समाप्त करने के प्रयासों को लेकर उठे विवाद पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था।
कर्नाटक से अपना कानूनी कॅरियर शुरू करने वाले न्यायमूर्ति दत्तू दिसंबर 2008 में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश बने थे। 13 दिसंबर, 1950 को जन्मे न्यायमूर्ति दत्तू ने 1975 में वकील के तौर पर पंजीकरण कराया था और बेंगलूर में वकालत करते हुए दीवानी, आपराधिक, कर और संवैधानिक सभी तरह के मामलों पर काम किया।
साल 1983 से वह कर्नाटक उच्च न्यायालय में बिक्री कर विभाग के लिए सरकारी वकील, आयकर विभाग के वकील और बाद में सरकारी अधिवक्ता समेत अनेक भूमिकाओं में पेश हुए। साल 1995 में आयकर विभाग के लिए वरिष्ठ वकील बनाये जाने के बाद न्यायमूर्ति दत्तू को कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में प्रोन्नत किया गया।
फरवरी 2007 में उन्हें छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया और कुछ दिन बाद वह केरल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने।
वह इस साल भारत के प्रधान न्यायाधीश के तौर पर शपथ लेने वाले उच्चतम न्यायालय के दूसरे न्यायाधीश हैं। न्यायमूर्ति लोढ़ा ने इस साल अप्रैल में शपथ ली थी।