पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
(फोटो – समन्वय के उद्घाटन समारोह मं प्रख्यात कवि और हिंदी लेखक तथा साहित्यिक सांस्कृतिक आलोचक अशोक वाजपेयी)
नई दिल्ली। प्रख्यात कवि और हिंदी लेखक तथा साहित्यिक सांस्कृतिक आलोचक अशोक वाजपेयी ने भारतीय भाषाओं के चौथे वार्षिक उत्सव 'समन्वय’ का गुरूवार को उद्घानटन किया और अपने उद्घाटन भाषण में 'साहित्य तथा हमारा समकालीन समय’ पर अपने विचार रखे।
वाजपेयी ने चार दिवसीय भारतीय भाषाओं के इस वार्षिक उत्सव में गायब होती भारतीय भाषाओं के बारे में अपने विचार रखते हुए भारतीयों के एक उस वर्ग की ओर इशारा किया जो आगे बढ़ने की रफ्तार में इन भाषाओं को इस्तेमाल करने से इंकार करता है।
वाजपेयी ने कहा, ' यूनेस्को की एक रिपोर्ट के अनुसार, हर रोज कहीं न कहीं एक भाषा मर रही है। एक नया वर्ग है जिसने भारत में जन्म लिया है जो पाखंडी है, इसकी एक विशेषता यह है कि ये लगातार अपनी मातृ भाषा से दूर होते जा रहे हैं।’
उत्सव के क्रिएटिव डायरेक्टर सत्यानंद निरूपम और गिरीराज किराडू ने उत्सव के इस वर्ष के मुख्य विषय 'भाषांतर देशांतर ट्रांसलेशन, ट्रांसनेशन’ पर अपने विचार रखे जिसमें भारतीय भाषाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है जिनकी देश के बाहर भी मौजूदगी है।
द्विभाषी जर्नल 'प्रतिलिप’ के संस्थापक-संपादक किराडू ने बताया कि इस वर्ष उत्सव का मुख्य विषय पिछले तीन उत्सवों का ही विस्तार है। पिछले उत्सव में हमने भाषाओं के बीच संपर्क के बारे में बात की थी, वहीं से हमने विभिन्न देशों के पार अनुवाद के बारे में विमर्श करने का फैसला किया था।
निरूपम ने बताया कि इस वर्ष इस उत्सव में भारत के पड़ोसी देशों के लेखकों की रचनाओं को सामने लाया जाएगा जो दशकों से किसी साझी भाषा में साझेदारी करते आए हैं। उन्होंने बताया, 'हमने देशभर से लेखकों को आमंत्रित किया है और इस वर्ष एक कदम और आगे बढ़ते हुए हमने पड़ोसी देशों बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका से बांग्ला, नेपाली तथा तमिल लेखकों को भी आमंत्रित किया है।’
राजकमल प्रकाशन समूह के संपादकीय निदेशक निरूपम ने कहा, 'भारत और पड़ोसी देशों के लेखकों को बांग्ला, तमिल और नेपाली साहित्य पर चर्चा करने के लिए एक ही मंच पर देखना दिल को छू लेने वाला है।‘
उत्सव के पहले दिन दिग्गज साहित्यकारों खुशवंत सिंह, यू. आर. अनंतमूर्ति , राजेन्द्र यादव, नबारूण भट्टाचार्य तथा बिपन चंद्रा को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
आगे देखिए : कार्यक्रम की तस्वीरें।
सभी फोटो : भूपिंदर सिंह।