(फाइल फोटो : एन.श्रीनिवासन )
नई दिल्ली। आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर एन.श्रीनिवास को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि जब कांट्रैक्टर भी आप ही थे और कंपनी भी, तो फिर हितों का टकराव भला कैसे नहीं हुआ। सर्वोच्च अदालत ने बीसीसीआई से फिर कहा कि क्रिकेट की शुद्धता को कायम रखा जाना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि जो लोग संदेह के दायरे में भी हों। उन्हें खेल से दूर रखा जाए।
सुप्रीम कोर्ट में जब श्रीनिवासन के वकील कपिल सिब्बल ने बचाव किया तो अदालत ने कहा कि आप कैसे कह रहे हैं कि हितों का टकराव नहीं है। जब कांट्रैक्टर भी आप ही हैं और कंपनी भी आप ही हैं। यानी कि जज भी आप ही और मुजरिम भी आप ही तो फिर बचा क्या। अदालत ने कहा कि टीम पर मालिकाना हक हितों को स्पष्ट करता है। बीसीसीआई के अध्यक्ष रहते आपके पास एक टीम थी।
इससे पहले सिब्बल ने कहा कि श्रीनिवासन का विरोधी खेमा इस मामले में उन्हें खींच रहा है। सिब्बल की ओर से वित्त मंत्री अरुण जेटली का नाम कई बार लिए जाने पर अदालत ने कड़ी नारजागी जतायी। अदालत ने कहा कि वह इस मामले में पक्षकार नहीं है, ऐसे में उन्हें बीच में नहीं लाएं। यह मानना मुश्किल है कि है कि हितों का टकराव नहीं था। जस्टिस टीएस ठाकुर व जस्टिस एफएमआई कलीफुल्ला की पीठ ने कहा कि जो व्यक्ति इस मामले में पक्षकार नहीं है। उसके नाम को आप क्यों पेश कर रहे हैं। आप भी बताइये जब कांट्रैक्टर भी आप और कांट्रैक्ट भी आपका तो फिर हितों का टकराव कैसे नहीं हुआ। याद रहे कि बीसीसीआई की एजीएम की बैठक 17 दिसंबर को है और एसे में श्रीनिवासन अदालत से क्लीन चिट चाहते थे। एसे में अदालत ने उन्हें एक झटका और दे दिया।