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7 वर्ष पहले
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(फाइल फोटोः आगरा में बजरंग बल द्वारा आयोजित हवन-पूजन कार्यक्रम में हिंदू धर्म अपनाते हुए मुस्लिम।)
नई दिल्ली। संसद में धर्म परिवर्तन को लेकर बुधवार को उस समय हंगामा खड़ा हो गया। जब बसपा सुप्रीमो मायावती ने आगरा में जबरन बजरंग दल की ओर से मुस्लिमों को हिंदू बनाने का मुद्दा उठा दिया। उनका समर्थन कांग्रेस, जदयू समेत अन्य दलों ने किया है। संसद में मायावती ने कहा कि लोगों को लालच देकर धर्मपरिवर्तन कराया जा रहा है, जो ठीक नहीं। इससे देश का सांप्रदायिक माहौल बिगड़ेगा।
राज्यसभा में बसपा सुप्रीमो ने कहा कि आगरा में आरएसएस की सहयोगी बजरंग दल ने जबरन धर्म परिवरर्तन कराया है। इस काम को लोगों को लालच देकर अंजाम दिया गया है। मायावती ने आरएसएस और भाजपा को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि यह कारगुजारी यदि जारी रही तो देश का सांप्रदायिक माहौल बिगड़ जाएगा।
कांग्रेस, वाम, तृणमूल कांगे्रस, जदयू सहित विभिन्न दलों के सदस्यों ने भी इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगते हुए देश में धर्मनिरपेक्षता को बरकरार रखने की मांग की। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने मांग की कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सदन में आकर इस मुद्दे पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘भारत एक जनतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र है और यह बना रहेगा। इसे बदलने का प्रयास नहीं होना चाहिए।’ कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने कहा कि किसी का दबाव या प्रलोभन देकर धर्मान्तरण करवाना एक जुर्म है। उन्होंने कहा कि इस मामले में गृह मंत्री को जवाब देना चाहिए।
सरकार का पक्ष रखते हुए संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार ने प्राथमिकी दर्ज करवाई है। उन्होंने कहा कि कानून एवं व्यवस्था राज्य सरकार का विषय है। इस मामले में कार्रवाई राज्य सरकार को करनी है। केंद्र सरकार इसमें कोई कार्रवाई नहीं कर सकती। नकवी ने इस मुद्दे में राजनीतिक कारणों से आरएसएस का नाम लेने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस मामले में किसी संगठन का नाम लेना उपयुक्त नहीं है। उन्होंने आसन से कहा कि आरएसएस का नाम सदन की कार्यवाही से निकाल दिया जाना चाहिए।