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7 वर्ष पहले
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(फाइल फोटो : याकूब मेमन )
नई दिल्ली। 1993 मुंबई ब्लास्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोषी करार दिए गए याकूब रज्जाक मेमन की पुनर्विचार याचिका पर महाराष्ट्र, सीबीआई और स्पेशल टास्क फोर्स को नोटिस जारी किया है। साथ ही इस मामले में अदालत ने मेमन की मौत की सजा पर 28 जनवरी तक रोक को जारी रखा है।
मुंबई ब्लास्ट के लिए मौत की सजा पाए याकूब मेमन को फांसी पर चढ़ाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में रोक लगा दी है। तब न्यायाधीश यूयू ललित ने इस मामले से खुद को अलग कर लिया था। यही वजह है कि नई पीठ ने इस मामले पर पुनर्विचार याचिका पर केंद्रीय एजेंसी को को नोटिस जारी कर अब जवाब तलब किया है। याकूब ने कहा है कि वह 20 साल जेल काट चुका है और ऐसे में अब उसे फांसी पर नहीं चढ़ाया जाना चाहिए।
मेमन ने मौत की सजा के मामले में रिव्यू पिटिशन ओपन कोर्ट में सुने जाने की गुहार लगाई है। मेमन की ओर से अर्जी दाखिल कर कहा गया है कि वह इस मामले में पिछले 20 साल से जेल में बंद है। उम्रकैद के मामले में भी 14 साल बाद रिहाई हो सकती है और इस लिहाज से वह उम्रकैद से ज्यादा सजा काट चुका है और ऐसे में उसे अब फांसी पर नहीं चढ़ाया जाना चाहिए। अर्जी में यह भी कहा गया कि एक ही अपराध के लिए पहले उम्र कैद और फिर फांसी नहीं दी जानी चाहिए। साथ ही अदालत को यह भी सूचना दी गई मेनन 1996 से स्कित्सोफीनिया बीमारी से ग्रसित है।

ओपन कोर्ट में सुनवाई का हाल ही में अदालत ने लिया था फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा उम्रकैद में बदले जाने की मेमन समेत तमाम याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था। जिसने कहा गया था कि जिन मामलों में डेथ पेनाल्टी हुई हो, उन मामलों में रिव्यू पिटिशन की सुनवाई चैंबर में नहीं बल्कि ओपन कोर्ट में होनी चाहिए।
20 साल पहले स्पेशल कोर्ट ने याकूब मेमन को फांसी की सजा सुनाई थी। जिसे पिछले साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह इस ब्लास्ट का मास्टर माइंड था। सीबीआई के मुताबिक याकूब मेमन ने अन्य फरार अपराधी दाऊद इब्राहिम और टाइगर मेमन के साथ साजिश रची थी। सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद उसने राष्ट्रपति के सामने मर्सी पिटिशन दाखिल की थी। राष्ट्रपति ने मर्सी पिटिशन खारिज कर दी थी।
1994 में पकड़ा गया था
मुंबई में 1993 के धमाके में 257 लोगों की मौत हुई थी। इस मामले में टाडा की स्पेशल कोर्ट ने याकूब मेमन समेत अन्य को दोषी करार दिया था। मेमन को फांसी की सजा सुनाई गई थी। उसे 1994 में काठमांडू के एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। पिछले साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने मेमन की फांसी की सजा को बरकरार रखा था।