(फाइल फोटो: सुप्रीम कोर्ट)
नई दिल्ली। भारतीय सैनिकों का सिर काटकर ले जाने की घटना पर पाकिस्तान को करारा जवाब देने में तत्कालीन यूपीए सरकार को कमजोर करार देने वाली
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने यू-टर्न ले लिया है। केंद्र सरकार ने इस मामले में जहां सुप्रीम कोर्ट को कुछ भी बताने से इंकार कर दिया है। साथ ही कहा है कि मनमोहन सरकार ने इस घटना के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रवैया अख्तियार किया था।
विदेश मंत्रालय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे में कहा गया है कि तत्कालीन सरकार की ओर से लाइन आफ कंट्रोल (एलओसी) के पास पाकिस्तानी सेना की ओर से भारतीय सैनिकों की सिर काटकर ले जाने की घटना के बाद कदम उठाए गए थे। याद रहे कि मौजूदा विदेश मंत्री ने लोकसभा चुनाव के दौरान कहा था कि हमें इस घटना का बदला लेना चाहिए। हमें उनके दस सिर काटकर लाने चाहिए। वहीं नरेंद्र मोदी ने भी तत्कालीन प्रधानमंत्री पर गंभीर कटाक्ष किया था। लेकिन अब मोदी सरकार ने कहा है कि
मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार की ओर से भारतीय सैनिकों का सिर काटने की घटना के बाद पड़ोसी मुल्क की सरकार को कड़ी चेतवानी दी गई थी। बीते साल 8 जनवरी को पाकिस्तानी सेना ने लांसनायक हेमराज सिंह और सुधाकर सिंह को
जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में एलओसी के पास मार दिया था और उनके सिर काटकर ले गए थे।
विदेश मंत्रालय ने हलफनामे में कहा है कि मनमोहन सरकार की ओर से चेतावनी दिए जाने के बाद पाकिस्तान डीजीएमओ ने यह आश्वासन दिया था कि सेना को यह निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि एलओसी के पास सीजफायर कायम रखें। हलफनामे के मुताबिक मनमोहन सरकार ने 15 जनवरी, 2013 को सार्वजनिक तौर पर पाकिस्तान को चेतावनी दिए जाने के बाद तत्कालीन विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने पाकिस्तानी सेना की ओर से इस घटना की भत्सर्ना की थी। साथ ही पाकिस्तान की ओर से इस घटना की जिम्मेदारी नहीं लेने और समुचित जवाब नहीं दिए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया की थी। हलफनामे में अदालत से कहा गया है कि इस मामले का न्यायपालिका से कोई वास्ता नहीं है। मंत्रालय ने यह जवाब सर्वमित्र की ओर से दायर जनिहत याचिका पर दिया है।
जनहित याचिका में सरकार की ओर से इस घटना के बाद कोई कदम नहीं उठाए जाने को लेकर जवाब तलब किए जाने और कदम उठाए जाने के संबंध में निर्देश देने की मांग की गई थी।