(फाइल फोटो : दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष सतीश उपाध्याय, दिल्ली प्रदेश बीजेपी प्रभारी प्रभात झा सहित बीजेपी के अन्य नेता चर्चा करते हुए )
नई दिल्ली। विकास के एजेंडे के सहारे कई चुनावी मोर्चे फतह करने वाली भाजपा मिशन दिल्ली को पूरा करने से पहले उठे धर्मांतरण जैसे मुद्दे और बीजेपी नेताओं के विवादास्पद बयानों से खासी परेशान है। भाजपा को यह लगता है कि इस तरह के मुद्दे दिल्ली और उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों को लगातार मजबूत बना रहे हैं, जो प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी के विकास के एजेंडे पर हावी हो रहे हैं और दोनों राज्यों में बीजेपी अपने विरोधी दलों को घेरने में नाकाम हो रही हैं। वहीं विपक्षी दलों के हाथ एक नया हथियार आ गया है।
दिल्ली में सांप्रदायकि माहौल के बिगड़ने का एक उदाहरण त्रिलोकपुरी के रूप में सामने आ चुका है। विरोधी दल इसके लिए पहले से ही भाजपा को कोस रहे हैं। वहीं संघ के सहयोगी संगठनों की ओर से
धर्म परिवर्तन के मुद्दे को तूल देने के बाद बचाव में जुटी भाजपा के लिए दिल्ली में होने वाले चुनाव से पहले परेशानियां बढ़ गई हैं।
लव जिहाद के नुकसान यूपी के उपचुनाव में झेल चुकी भाजपा दिल्ली में फूंक-फूंककर कदम रखना चाहती है। याद रहे कि उपचुनाव में भाजपा उत्तर प्रदेश में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। ऐसे में भाजपा का शीर्ष नेतृत्व विवादास्पद मुद्दों के कांटों की चुभन को महसूस कर रहा है और संघ को लगातार ताकिद भी कर रहा है, लेकिन संघ के सहयोगी संगठन हैं कि हिन्दुत्व के आक्रामक रवैये को जारी रखने की जिद में है, जो दिल्ली और उत्तर प्रदेश के चुनाव में भाजपा के लिए बड़े नुकसान की वजह बन सकता है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में भाजपा के पास मोदी के विकास कार्ड के सहारे चुनाव लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। क्योंकि दिल्ली में कोई लोकप्रिय नेता फिलहाल दिल्ली के पास नहीं है। जबकि भाजपा को सीधे तौर पर टक्कर देने वाली आम आदमी पार्टी के पास अरविंद
केजरीवाल हैं। आप की सेकेंड लाइन के नेता भी काफी चर्चित हैं।
भाजपा के सूत्रों के मुताबिक हिन्दुव एजेंडे को विपक्षी दल आप और कांग्रेस उसके खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकती है। वहीं पार्टी और सरकार में हाशिये पर चल रहे बड़बोले नेता संघ को ढाल बना कर इन विवादास्पद मुद्दों पर बढ़-चढ़ कर बयानबाजी कर रहे हैं। दिल्ली में मोदी के विकास मॉडल पर भारी पड़ते हिन्दुत्व राग ने भाजपा के रणनीतिकारों को भी फिलहाल असमंजस में डाल दिया है। क्योंकि रणनीतिकारों को लगता है कि अगर जल्द ही बड़बोलेपन से पैदा होते हालात संभाले नहीं गए तो मतदाता सीधे तौर पर प्रभावित होंगे और विपक्ष इसे भुनाने में पीछे नहीं रहेगा।
गौरतलब है कि दिल्ली भाजपा के पास आप के खिलाफ केजरीवाल के मुख्यमंत्री पद छोड़ने और कांग्रेस की पिछली सरकार में हुए भ्रष्टाचार का मुद्दा ही है, जो हिन्दुत्व एजेंडे के जारी रहते फीका पड़ सकता है और विपक्ष इस हथियार बनाकर भाजपा के खिलाफ इस्तेमाल कर सकता है।