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7 वर्ष पहले
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(फाइल फोटो :ललित नारायण मिश्रा, पूर्व रेल मंत्री)
नई दिल्ली। पूर्व रेलमंत्री ललित नारायण मिश्रा हत्याकांड मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने आज सजा तय करने को लेकर आरोपी और बचाव पक्ष की दलीलों पर गौर करने के बाद सजा सुनाने के लिए 18 दिसंबर की तारीख तय कर दी। सजा पर बहस के दौरान सीबीआई ने दोषियों को मृत्युदंड दिए जाने का फैसला अदालत पर छोड़ दिया।
सीबीआई के वकील एनके शर्मा ने कहा कि इस हत्याकांड मामले में एक लंबा समय लगा, जिसके लिए ना ही अभियोजन पक्ष जिम्मेदार है और ना ही आरोपी पक्ष। शर्मा ने चारों आरोपियों को फांसी दिए जाने की मांग नहीं करते हुए कहा कि इस मामले में अदालत यह तय करे कि यह अपराध दुलर्भतम श्रेणी के दायरे में आता है या नहीं। वहीं आरोपी रंजन दिवेदी, जो एक वकील भी हैं। उन्होंने जिला जज विनोद गोयल से कहा कि खराब किस्मत के चलते वह इस मामले मे दोषी करार दिए गए हैं। दिवेदी ने कहा कि मैं एक निर्दोष व्यक्ति हूं। वहीं अन्य आरोपियों की ओर से पेश हुए वकीलों ने भी अपने मुवक्किलों को निर्दोष करार दिया। याद रहे कि 8 दिसंबर को अदालत ने पूर्व रेलमंत्री की हत्या के मामले में चार आरोपियों को दोषी करार दिया था। अदालत ने आरोपी वकील रंजन दिवेदी, गोपालजी, संतोषानंद और सुदेवनंद को हत्या मामले में लिप्त पाया था। करीब चालीस साल से लंबित इस मामले का फैसला सुनाते हुए सजा पर बहस की तारीख 15 दिसंबर तय की गई थी।
आज जिला अदालत ने दोनों पक्षों पर गौर करने के बाद 18 दिसंबर को सजा सुनाने की तारीख तय कर दी। खास बात ये है कि लंबे अरसे से लटके इस मामले में जहां अभियोजन पक्ष ने फांसी नहीं मांगी। वहीं बचाव पक्ष ने कम से कम सजा की गुजारिश करने की बजाया खुद को निर्दोष बताया। याद रहे कि जिला जज ने फैसला सुनाते हुए 8 दिसंबर को कहा था सबूतों और स्थितियों के आधार पर अदालत एलएन मिश्रा हत्या मामले में संतोषानंद अवधूत, सुदेवनंद अवधूत, रंजन द्विवेदी और गोपालजी को दोषी करार देती है। अभियोजन पक्ष की ओर से दी गई दलीलें साक्ष्यों और स्थितियों को स्पष्ट करती हैं कि चारों आरोपियों ने मिलकर हत्या की साजिश रची थी।
घटनाक्रम के अनुसार दो जनवरी,1975 को बिहार के समस्तीपुर रेलवे स्टेशन के पास आयोजित समारोह में हुए बम धमाके में पूर्व रेलमंत्री ललित नारायण मिश्रा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। तीन जनवरी को उनकी मौत हो गई थी। मामले में 200 से अधिक गवाह थे। इस हत्याकांड में अभियोजन पक्ष की ओर से संतोषानंद अवधूत, सुदेवनंद अवधूत, रंजन द्विवेदी और गोपालजी को आरोपी बनाया गया था, जिस पर आज अदालत ने मुहर लगा दी। अभियोजन पक्ष की ओर से 161 और बचाव में 40 गवाहों को अदालत में पेश किया गया था। सीबीआई ने पटना में एक नवंबर, 1977 को मामले की चार्जशीट दायर की थी। वर्ष 1979 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत में स्थानांतरित कर दिया था। आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट से अपने खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने 17 अगस्त, 2012 को आरोपियों की मांग खारिज कर दी थी। इसके साथ ही जल्द इस मामले का निपटारा करने के आदेश भी जारी किए थे। कड़कड़डूमा कोर्ट में सितंबर, 2012 में मामले की सुनवाई शुरू हुई थी।