(फाइल फोटो : सुप्रीम कोर्ट)
नई दिल्ली। 2जी स्पेक्ट्रम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के नए निदेशक अनिल सिन्हा को जांच और अभियोजन पर चार्ज लेने की अनुमति प्रदान कर दी है। तत्कालीन निदेशक रंजीत सिन्हा को अदालत ने जांच और अभियोजन से दूर रहने का आदेश दिया था। इसी के चलते नए निदेशक को दखल की मंजूरी प्रदान की गई है।
सर्वोच्च अदालत ने सीबीआई के तत्कालीन निदेशक रंजीत सिन्हा से कहा था कि वे 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच से दूर हो जाएं। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने रंजीत सिन्हा के रिटायर होने के बाद पिछले आदेश को वापस लेते हुए नए निदेशक अनिल सिन्हा को जांच और अभियोजन का चार्ज लेने की जिम्मेदारी सौंप दी। याद रहे कि अदालत ने नवंबर में रंजीत सिन्हा को चेतावनी देते हुए कहा था कि हमें लगता है कि सब कुछ सही नहीं है। हम इस मामले में विस्तृत आदेश नहीं जारी कर रहे हैं, क्योंकि इससे सीबीआई की साख खराब हो सकती है। लेकिन प्रथम दृष्ट्या ऐसा लगता है कि एनजीओ की ओर से दायर अर्जी में जो आरोप लगाए गए हैं। उनमें कुछ विश्वसनीयता है। इसलिए सीबीआई निदेशक रंजीत को हम निर्देश देते हैं कि वह 2जी मामले की जांच से दूर रहें और उसमें किसी प्रकार का हस्तक्षेप न करें।
दरअसल तत्कालनी सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा पर आरोप था कि वे 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के दायरे में आने वाली टेलिकॉम कंपनियों के अधिकारियों से दिल्ली स्थित अपने सरकारी घर पर मिलते थे। सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन नाम के एनजीओ ने इसी आधार पर सिन्हा को जांच से अलग रखे जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। आम आदमी पार्टी के नेता और वकील प्रशांत भूषण इसी एनजीओ की ओर से कोर्ट में इस केस में जिरह करते हैं।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले आदेश में 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच की जिम्मेदारी जांच कर रही टीम के सबसे वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी दी थी और इसके बाद से रंजीत सिन्हा का इस मामले में दखल पूरी तरह खत्म हो गया था।
क्या है 2 जी घोटाला?
2 जी घोटाला साल 2010 में तब सामने आया था जब तत्कालीन सीएजी (महालेखाकार और नियंत्रक) ने अपनी एक रिपोर्ट में साल 2008 में किए गए स्पेक्ट्रम आवंटन पर सवाल खड़े किए। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में कंपनियों को नीलामी की बजाए 'पहले आओ और पहले पाओ' की नीति पर लाइसेंस दिए गए थे, जिसमें सीएजी रिपोर्ट के अनुसार सरकारी खजाने को एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। आरोप था कि अगर लाइसेंस नीलामी के आधार पर दिए गए होते तो खजाने को कम से कम एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए और मिल सकते थे। हालांकि, सीएजी के नुकसान के आंकड़ों पर कई तरह के आरोप लगे, लेकिन ये एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया। इस मामले से जुड़ा मुकदमा सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।