नई दिल्ली। एक ओर जहां दिल्ली के मतदाताओं ने इस बार विधानसभा चुनाव में बढ़-चढ़ कर मतदान किया। वहीं दिल्ली में एक गांव ऐसा भी रहा जहां गांववालों जहां मतदान बेहद कम रहा। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के मुताबिक नरेला विधासनसभा क्षेत्र के झंगोला गांव के अधिकतर मतदाओं ने शनिवार को हुए चुनाव का बहिष्कार किया।
केवल 150 लोगों ने डाला वोट
उत्तर पश्चिम दिल्ली में पड़ने वाले इस गांव में करीब 2500 वोटर हैं। लेकिन शनिवार को सिर्फ 150 लोगों ने ही अपना वोट डाला। इस गांव के रिटर्निंग ऑफिसर और एसडीएम निकिता परमार ने कहा, ‘इलाके के दो पोलिंग स्टेशनों में बेहद कम वोट पड़े क्योंकि गांववालों पहले ही चुनाव के बहिष्कार का फैसला कर चुके थे।’ गांववालों द्वारा चुनाव के बहिष्कार की घोषणा के बाद यहां सीआरपीएफ की दो यूनिटें तैनात की गई थी।
बुनियादी सुविधाओं का आभाव
नरेला विधानसभा क्षेत्र में पड़ने वाला यह इकलौता गांव हैं जहां 95 प्रतिशत सिख आबादी है। गांववालों का कहना है कि चुनाव प्रचार के दौरान एक भी उम्मीदवार ने उनसे संपर्क नहीं किया। गांव में उचित सीवरेज प्रणाली, श्मशान भूमि, कम्युनिटी हॉल, परिवहन और सड़कों जैसी बुनियादी सुविधाओं का आभाव है। गांव के निवासी 72 साल के दलीब सिंह ने कहा, ‘मैंने अपनी सारी जिंदगी यहां बिता दी और मेरी यही इच्छा है कि गांव में विकास के कुछ काम होता देखूं।’ दलीब सिंह ने पिछले चार विधानसभा चुनाव से वोट नहीं डाला है।
गांव के एक और निवासी के मुताबिक, ‘हमने चुनाव के बहिष्कार का फैसला किया और इस बार नोटा को भी अपने ऑप्शन के तौर पर नहीं चुना।’ गांव के रहने वाले गुरविंदर सिंह ने कहा, ‘यहां सिर्फ एक प्राथमिक स्कूल है जो कि एनडीएमसी द्वारा चलाया जा रहा है। एक सरकारी स्कूल करीब सात किलोमीटर दूर हैं। हमारे यहां बस स्टॉप भी नहीं है। यहां से सबसे करीबी बस स्टॉप भी पांच किलोमीटर दूर है। सुनसान सड़कों पर चलते हुए महिलाएं असुरक्षित महसूस करती हैं। सड़कों स्ट्रीट लाइट भी नहीं है।’
पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के लिए बसाया गया था गांव
भारत-पाक बंटवारे के दौरान आए शरणार्थियों को घर देने के लिए इस गांव को बसाया गया था। मूल रूप से पाकिस्तान से आए 36 सिख परिवारों को यहां जमीन दी गई थी।