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पठान कमेटी की सिफारिशों पर मांगी गई रिपोर्ट

7 वर्ष पहले
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चंडीगढ़। सभी सेंट्रल यूनिवर्सिटीज में यूनिफॉर्म नियम और कानूनों के लिए बनी पठान कमेटी की रिपोर्ट पर सेंट्रल यूनिवर्सिटीज के वाइस चांसलरों से जल्द कमेंट करने के लिए कहा गया है। ह्यूमन रिसोर्स डवलपमेंट मिनिस्टर स्मृति जुबिन इरानी ने ये निर्देश शुक्रवार को शहर में शुरू हुई दो दिवसीय मीट में दिए हैं। इस विवादित मुद्दे पर डिसकशन को एजेंडे में रखा गया था लेकिन डिसकशन की बजाए इस प उनसे लिखित कमेंट मांगे गए हैं जिसके लिए कोई टाइम लाइन नहीं दी गई है।
ये है पठान कमेटी
सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ कर्नाटक के पूर्व वीसी प्रो एएमपठान, मिनिस्ट्री ऑफ लॉ एंड जस्टिस के पूर्व सेक्रेटरी वीके भसीन और बनारस हिंदु यूनिवर्सिटी के पूर्व वीसी प्रो वाईसी सिमहादरी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन यूजीसी ने अप्रैल 2013 में किया था। मिनिस्ट्री ऑफ ह्यूमन रिसोर्स डवलपमेंट के अंर्तगत 43 यूनिवर्सिटीज हैं। इसमें 12 यूनिवर्सिटीज जो 2009 के एक्ट के तहत बनी हैं, उनके लिए कानून एक है। बाकियों के लिए अलग-अलग एक्ट हैं। यशपाल कमेटी और नेशनल नॉलेज कमीशन की सिफारिश पर सभी यूनिवर्सिटीज में एक समान कानून बनाने का प्रस्ताव रखा गया था। इस कानून सेंट्रल यूनिवर्सिटीज के वाइस चांसलर्स से डिसकस किया जाना था।
ये है मुख्य सिफारिशें
पठान कमेटी ने सिफारिश की है कि काउंसिल ऑफ चांसलर्स (सीवीसी) का गठन किया जाए। सीवीसी अप्वाइंटमेंट के साथ ही पॉलिसी और एकेडमिक मैटर पर भी सभी यूनिवर्सिटीज को सलाह दे सकेगी। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, टीचर्स और इंप्लाइज की संख्या, कोर्स व रिसर्च का डिटेल और अन्य संस्थाओं से होने वाले साझा प्रोजेक्ट, एकेडमिक व प्रशासनिक मसलों पर भी अपनी रिपोर्ट यूजीसी को देगी।
ऐसे बनेगी सीवीसी :
इसमें एमएचआरडी व यूजीसी के चेयरपर्सन, सभी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के वीसी के अलावा मानव संसाधन, वित्त, विज्ञान व तकनीकी और युवा मामले मंत्रालय के एक-एक प्रतिनिधि शामिल होंगे। इनके अतिरिक्त विजिटर 5 और संसद 3 सदस्यों को नामिनेट करेंगे। इसके बाद
यूपीएससी पैटर्न पर नियुक्तियां होंगी।
यूपीएससी में आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति के दौरान उनसे नियुक्ति वाली जगहों के बारे में विकल्प मांगे जाते हैं। इसी तरह इस नई व्यवस्था में नियुक्तियों के लिए विकल्प मांगे जाएंगे, लेकिन अंतिम निर्णय सीवीसी का ही होगा। यह जरूरी नहीं होगा कि संबंधित अधिकारी व कर्मचारी को उसके स्टेट की सेंट्रल यूनिवर्सिटी में ही नियुक्ति मिले।
ये हैं फायदे ---
नियुक्ति की प्रक्रिया सेंट्रलाइज होने से लोकल स्तर पर होने वाली नियुक्तियों में भ्रष्टाचार पर रोक लग सकेगी।
सेंट्रल यूनिवर्सिटीज का एकेडमिक लेवल और एजुकेशन का लेवल बढ़ेगा
एमएचआरडी व केंद्रीय मंत्रालयों का सीधा दखल होने से गड़बडिय़ां नहीं होंगी।
नई व्यवस्था में यूपीएससी पैटर्न से नियुक्तियां होंगी।
ये होंगे नुकसान :
यूनिवर्सिटीज की ऑटोनॉमी प्रभावित होगी। वह स्वतंत्र प्रभार से काम नहीं कर सकेंगी
इसकी वजह से काम में मिनिस्ट्रीज का दखल बढ़ेगा
सेंट्रल भर्ती से बाकी डिपार्टमेंट जैसा ही हाल हो जाएगा, भर्ती में देरी के कारण टीचर्स और नियुक्तियां लेट होंगी जिससे एजुकेशन का लेवल बढ़ेगा
यूजीसी की पावर ज्यादा बढ़ जाएगी। वह फिलहाल रेगुलेटरी बॉडी है, इससे उसके बाद एडमिनिस्ट्रेटिव पावर भी आ जाएगी। एएमयू सहित कई यूनिवर्सिटियों के यूनीक स्टेटस पर असर पड़ेगा। इसका उन्हें नुकसान हो सकता है