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कांग्रेस में प्रत्याशियों पर कंफ्यूजन जारी, लिस्ट 19 सितंबर के बाद ही फाइनल होगी

7 वर्ष पहले
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हरियाणा कांग्रेस में अपने बच्चों के लिए टिकट हासिल करने के लिए दिग्गज नेताओं ने एडीचोटी का जोर लगा रखा है। कांग्रेस इन नेताओं को नाराज भी करने की स्थितिमें भी नहीं है, जिससे प्रत्याशियों की सूची जारी करने में विलंब हो रहा है। हालांकि प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक तंवर का कहना है कि उन्होंने टिकट आवंटन को लेकर अपनी अंतिम राय दे दी है और अब फैसला कांग्रेस आलाकमान के हाथ में है। हरियाणा में चार नेता ऐसे हैं जो अपने बच्चों के लिए टिकट की मांग कर रहे हैंं। प्रस्तुत है मनोज ठाकुर की यह रिपोर्ट-:
चंडीगढ़। हरियाणा में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी, लेकिन कांग्रेस में प्रत्याशियों को लेकर अभी भी स्थिति क्लियर नहीं है। कई दौर की बैठकों के बाद भी कुछ सीटों पर सर्वसम्मति से सहमती नहीं बन पा रही है। इस वजह से लिस्ट को फाइनल नहीं किया जा रहा है। पार्टी की दिक्कत यह है कुछ नेता इस बार चुनाव खुद लडऩे की बजाय अपने बच्चों के लिए टिकट चाह रहे हैं।
इसके साथ ही हरियाणा जनहित कांग्रेस से आए विधायकों को टिकट दिया जाए या नहीं इस पर भी मतभेद बने हुए हैं। पार्टी प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर ने स्वीकार किया कि कैंडिडेट फाइनल होने में कुछ समय लग सकता है। 19 सितंबर के बाद ही उनके कैंडिडेट्स फाइनल होने की उम्मीद है।

चट्ठा खुद के लिए नहीं बेटे के लिए चाहते हैं टिकट
वित्त मंत्री हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा अपने बेटे मनदीप चट्ठा के लिए टिकट चाह रहे हैं। चुनाव न लडऩे के पीछे उनका तर्क है कि अब उम्र ज्यादा हो गई। इसलिए बेटे को राजनीति में आगे बढ़ाना चाहते हैं। कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष फूल चंद मुलाना भी बेटे वरूण मुलाना को लड़ाना चाह रहे हैं। कैप्टन अजय यादव चिरंजीवी यादव खुद के साथ बेटे के लिए टिकट चाह रहे हैं। इसी तरह से आबकारी एवं कराधान मंत्री किरण चौधरी अपनी बेटी व पूर्व सांसद श्रुति चौधरी और सीएम के ओएसडी केवी सिंह भी अपने बेटे अमित के लिए टिकट की कोशिश में जुटे हैं। मौजूदा विधायक इधर शकुंतला खटक, जगबीर मलिक व श्रीकृष्ण हुड्डा व डीके बंसल के टिकट पार्टी काटना चाह रही है। लेकिन इस पर भी अभी अंतिम राय नहीं बन रही।
हजकां से आए विधायकों पर भी एकमत नहीं है
हजकां से आए विधायकों को एडजेस्ट करें या नहीं। इस पर भी एकमत नहीं है। तर्क दिया जा रहा है कि यदि उन्हें एडजेस्ट नहीं किया गया तो यह संदेश जाएगा कि कांग्रेस यूज एंड थ्रो की नीति पर काम कर रही है। जिससे भविष्य में पार्टी के साथ दूसरे नेताओं को जोडऩा मुश्किल हो सकता है। लेकिन सीडी कांड में फंसे स्वास्थ्य मंत्री राव नरेंद्र सिंह और विनोद भयाना को लेकर पार्टी में सहमति नहीं बन रही है। इसी तरह से जिले राम शर्मा को लेकर भी असमंजस बनी हुई है।
तंवर चाहते हैं- जिनकी निष्ठा पर शक, उन्हें टिकट से वंचित किया जाए
इधर प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर चाहते हैं कि ऐसे नेताओं को टिकट न मिले, जिनकी लोकसभा चुनाव में निष्ठा पर शक रहा है। इसके पीछे उनकी सोच है कि पार्टी अनुशासनहीनता को लेकर सख्त संदेश दे। यह तभी संभव है, जब ऐसा करने वालों की टिकट काटी जाए। लेकिन इसमें समस्या यह आ रही है कि सीएम की सोच इससे अलग है। तर्क यह दिया जा रहा है कि यदि ऐसे नेतआों का टिकट काट दिया गया तो पार्टी सीट हार सकती है। अब जबकि एक एक सीट कीमती है, ऐसे में हार का यह जोखिम नहीं उठाया जाना चाहिए।
देरी की एक वजह यह भी
कांग्रेस की कोशिश है कि अपनी लिस्ट तब फाइनल की जाए जब टिकट कटने वाले नेतआें के पास दूसरी पार्टी में जाने का विकल्प न बचे। इसलिए भी यह देरी हो रही है।
टिकट किसे दिया जाए यह पार्टी हाइकमान तय करेगा : तंवर
इधर भास्कर से बातचीत में अशोक तंवर ने बताया कि हमने अपनी राय दे दी है। टिकट किसे दिया और कौन कहां से लड़ेगा यह पार्टी आलाकमान तय करेगा। अभी लिस्ट फाइनल करने में कुछ समय लगेगा। यह काम 19 सितंबर के बाद ही फाइनल हो पाएगा। हालांकि कई दौर की बैठक हो चुकी है। सीटों पर मतभेद को लेकर उनका कहना है कि राय अलग अलग हो सकती है, लेकिन टकराव नहीं है। हम सब कांग्रेस की जीत के लिए काम कर रहे हैं।
आगे तस्वीरों में देखिए अपने बच्चों को टिकट दिलवाने की चाहत रखने वाले नेता