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मोदी सरकार के धान संबंधी नियम पंजाब विरोधी: बाजवा

7 वर्ष पहले
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चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस के प्रधान प्रताप सिंह बाजवा ने धान की खरीद संबंधी एनडीए सरकार द्वारा तय किए गए नए नियमों की निंदा की है। इसको पंजाब विरोधी, किसान विरोधी व मिलर विरोधी बताया है।
उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल व उनकी पार्टी में कोई आत्म सम्मान है, तो उनकी पार्टी को मोदी सरकार से बाहर आ जाना चाहिए। उन्होंने केन्द्र सरकार के धान में नमी की सीमा को 15 से घटाकर 14 फीसदी करने के फैसले की निंदा की, जो किसानों के साथ-साथ शैलर मालिकों पर भी बुरा प्रभाव डालेगा। खरीद एजेंसियां तो पहले ही ज्यादा नमी की बात कहकर धान कीे खरीदने से आनाकानी कर रही थीं अब यह फैसला राईस मिलरों के लिए और परेशानी बढ़ाएगा। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि बेवक्त बारिश के चलते नमी की मात्रा ज्यादा होने की आशंका है व ऐसे में धान को सूखने में और समय लगेगा।

कांग्रेस ने कहा है कि शैलर मालिकों को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाला फैसला, धान के मिलिंग पीरियड को करीब दो महीने कम करना है। इससे पहले धान की मिलिंग के लिए तय सीमा 30 जून थी, जिसे अब कम करके 15 अप्रैल कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जिस मात्रा से राज्य की मंडियों में धान की आमद होगी, मिल मालिकों के लिए इस थोड़े से समय के दौरान अपना काम पूरा करना मुश्किल होगा।

उन्होंने केन्द्र में अपनी ही सरकार के पंजाब विरोधी फैसलों के खिलाफ आवाज न उठाने वाले बादल की निंदा की है, जो लोगों के साथ वायदा कर रहे थे कि केन्द्र में सरकार बदलने के साथ यू.पी.ए सरकार द्वारा राज्य के साथ कथित पक्षपात का खात्मा हो जाएगा और एक नई शुरूआत होगी।
उन्होंने कहा कि इससे पहले केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बादल की पिछली सरकार के खिलाफ आरोप लगाने की नीति का खंडन किया था व पंजाब के लिए स्पेशल पैकेज की मांग को नकारते हुए तर्क दिया था कि राज्य यू.पी.ए सरकार से ज्यादा फंड प्राप्त कर रहा था। यह बादल सरकार के लिए पहला झटका था। जबकि नए धान संबंधी नियम एक और धक्का हैं। अब बादल को पंजाब के लोगों को बताना चाहिए कि क्या यू.पी.ए सरकार, जिसके खिलाफ वह आरोप लगा रहे थे, ने पंजाब के साथ सौतेली मां जैसा व्यवहार किया था या फिर मोदी सरकार कर रही है। अपनी विकृत सोच पर स्पष्टीकरण देना उनका नैतिक फर्ज बनता है।

वह जानना चाहते हैं कि मोदी सरकार में अकाली दल से केन्द्रीय फूड प्रोसेसिंग मंत्री हरसिमरत कौर बादल इस फैसले में हिस्सेदार है या नहीं। उन्होंने कहा कि पिछली एन.डी.ए सरकार ने सुखबीर सिंह बादल के केन्द्रीय उद्योग राज्यमंत्री रहते हुए पड़ोसी राज्यों को औद्योगिक छूट दे दी थी। दोनों हालातों में बहुत समानता थी। बादल को इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।