चंडीगढ़। कम बरसात की वजह से इस बार बिजली की डिमांड ज्यादा हो रही है। इधर बिजली कंपनियों के लिए दिक्कत यह है कि ज्यादातर बिजली खरीद सौदे 30 सितंबर तक है। प्रदेश में आचार संहिता लग चुकी है। ऐसे में अब बिजली खरीद के सौदों को आगे बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग से इजाजत लेनी होगी। अदानी ने ऐसे समय में बिजली देना बंद किया जब हरियाणा को बिजली की सख्त जरूरत थी। बरसात से प्रदेश में बिजली की डिमांड में कुछ कमी आई, लेकिन अब यदि मौसम खुश्क रहा तो डिमांड बढ़ सकती है। अब यदि बिजली की किल्लत आई तो विपक्ष चुनाव के समय में इसको बड़ा मुद्दा बना सकता है।
20 अक्टूबर तक रहती है बिजली की ज्यादा डिमांड
प्रदेश में कुछ सालों का रुझान रहा है कि 20 अक्टूबर तक बिजली की डिमांड रहती है। इस बार 15 अक्टूबर को मतदान है। यानी तब तक अचार संहिता रहेगी। इस पर दूसरी दिक्कत यह है कि पानीपत की छह यूनिट बंद है। इसके लिए तो 30 सितंबर तक तो इंतजाम है। अभी लगभग 60 सोर्स से प्रदेश में बिजली खरीद जा रही है। अदानी से 1424 मेगावाट बिजली की बंद होने के बाद भी अभी हरियाणा बिजली उत्पादन निगम (एचपीजीसीएल) से करीब 2650 मेगावाट, केंद्र और दूसरे सभी स्रोतों से हरियाणा को इस समय ३२४८ मेगावाट बिजली मिल रही है। मुंद्रा-महेंद्रगढ़ बिजली वितरण की लाइनों पर जहां २७ अगस्त तक अदानी की कंपनी से बिजली आती थी अब उन लाइनों से दूसरे सॉर्स से खरीदी बिजली जिसमें टाटा की 200 मेगावाट बिजली भी शामिल है आ रही है।
सभी इंतजाम पूरे हैं: देवेंद्र सिंह
वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव, बिजली निगम देवेंद्र सिंह ने बताया कि प्रदेश में बिजली की कमी नहीं आने दी जाएगी। हमने सभी इंतजाम पूरे कर रखे हैं। जो शेड्यूल है उसके अनुसार बिजली दी जा रही है।