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गंगापुत्र सीएम हुड्डा की कहानी

7 वर्ष पहले
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चंडीगढ़। हरियाणा के सीएम भुपिंदर सिंह हुड्‌डा का जन्मदिन है, प्रदेश में चुनावी माहौल के चलते जाहिर है उन्हें जन्मदिन की शुभकामनओं के साथ उनके समर्थकों ने उनकी जीत और दोबारा मुख्यमंत्री बनने की कामनाएं भी आज की। आइए उनके जन्मदिन पर उनके व्यकि्तत्व से आपको अवगत करवाते हैं।
हुड्‌डा का स्वभाव
हरियाणा के सीएम भुपिंदर हुड्‌डा बेहद सौम्य छवि, मिलनसार और सलीके से बात करने वाले व्यक्ति हैं। हुड्डा में कुछ बात है, जो उन्हें पारंपरिक सियासी नेताओं से अलग खाके में रखती है। दोस्तों और अपने बुरे वक्त में साथ देने वालों की वे खुल कर मदद करते हैं। कांग्रेस के नौ साल के कार्यकाल में उन्होंने जिस तरह से कांग्रेस सरकार चलाई वह अपने आप में बड़ी बात है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा का जन्म
भूपेंद्र सिंह हुड्डा का जन्म 15 सितंबर, 1947 को हरियाणा के रोहतक जिले में हुआ था। पिता चौधरी रणबीर सिंह स्वतंत्रता सेनानी थे। हुड्डा ने सैनिक स्कूल, कुंजपुरा (हरियाणा) से अपनी स्कूली शिक्षा ली। पंजाब यूनिवर्सिटी से स्नातक और दिल्ली विश्वविद्यालय से लॉ किया। उन्होंने 1976 में आशा दहिया से शादी की।

भुपिंदर सिंह हुड्डा का राजनैतिक सफर
1972 में किलोई, हरियाणा के ब्लॉक कांग्रेस समिति के अध्यक्ष बने। लगातार चार बार 1991, 1996 , 1998 , 2004 में लोकसभा के सदस्य बने। यहां तीन बार पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवी लाल को भी उन्होंने हराया था। 2001-2004 तक हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता रह चुके हैं। 2005 में हुड्डा प्रदेश के मुख्यमंत्री बनाए गए। 2009 में कांग्रेस को दोबारा जीत दिलवाई।
इसलिए नाम दिया हुड्डा को गंगापुत्र

जुलाई 2003 में चचेरे भाई और दोस्तों के साथ हरिद्वार जा रहे थे। रास्ते में एक छोटी नदी को पार कर रहे थे। लेकिन अचानक ही नदी में बाढ़ आ गई। हुड्डा की कार नदी में बह गई। हुड्डा भी पानी में बह गए। दूर तक बहते चले गए। इसी बीच उनके हाथ में एक पेड़ की शाखा आ गय गई। पूरी रात उसी शाखा के सहारे पानी में खुद को बचाते रहे। उनका चचेरा भाई राजेंद्र हुड्डा बह गए और उनका आज तक पता नहीं चला। हादसे में हुड्डा और उनके साथी बच गए। यहीं से उनका नाम गंगापुत्र दिया गया।