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पढ़िए इसके प्रमुख लक्षण

7 वर्ष पहले
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चंडीगढ़। डायबिटीज एक खतरनाक रोग है। इस बीमारी का प्रमुख लक्षण रक्त ग्लूकोस स्तर बढ़ जाता है,साथ ही इन मरीजों में रक्त कोलेस्ट्रॉल,वसा के अवयव भी असामान्य हो जाते है। इन मरीजों में आंखों, गुर्दों, स्नायु, मस्तिष्क, हृदय के क्षतिग्रस्त होने से इनके गंभीर, जटिल, घातक रोग का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज होने पर शरीर में भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करने की सामान्य प्रक्रिया के रूप में भोजन पेट में जाकर एक प्रकार के ईंधन में बदलता है जिसे ग्लूकोज कहते हैं।
जीवा आयुर्वेद के आयुर्वेदाचार्य एंड डायरेक्टर डॉक्टर प्रताप चौहान के अनुसार ग्लूकोज रक्त धारा में मिलता है और शरीर की लाखों कोशिकाओं में पहुंचता है। अग्नाशय वह अंग है जो रसायन उत्पन्न करता है और इस रसायन को इंसुलिन कहते हैं। इंसुलिन भी रक्त धारा में मिलता है और कोशिकाओं तक जाता है। ग्लूकोज से मिलकर ही यह कोशिकाओं तक जा सकता है। शरीर को ऊर्जा देने के लिए कोशिकाएं ग्लूकोज को उपचित (जलाती) करती है। ये प्रक्रिया सामान्य शरीर में होती हैं।
डायबिटीज के कारण
1. व्यायाम का अभाव
2. मानसिक तनाव
3. अत्यधिक नींद
4. मोटापा
5. चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट के अत्यधिक सेवन
6. मूत्र बार-बार एवं अधिक मात्रा में होना तथा मूत्र त्यागने के स्थान पर मूत्र की मिठास के कारण चींटियां लगना।
7. शरीर में वर्ण अथवा फोड़ा होने पर उसका घाव जल्दी न भरना।
8. शरीर पर फोड़े-फुंसियां बार-बर निकलना।
9. शरीर में निरंतर खुजली रहना एवं दूरस्थ अंगों का सुन्न पडऩा।
10. वंशानुगत कारकों
लक्षण
मधुमेह होने के कई लक्षण रोगी को स्वयं अनुभव होते हैं। इनमें बार-बार रात के समय पेशाब आते रहना, त्वचा में खुजली होना, धुंधला दिखना, थकान और कमजोरी महसूस करना, पैरों का सुन्न होना, प्यास अधिक लगना, घाव भरने में समय लगना, हमेशा भूख महसूस करना, वजन कम होना और त्वचा में संक्रमण होना आदि प्रमुख हैं।
आयुर्वेदिक नजरिया
आयुर्वेद में डायबिटीज मेरिट्स को मधुमेह के रूप में जानते है, मधुमेह जिसे दो अलग रूपों में देखने पर सही अर्थ का पता चलता है मधु का अर्थ 'शहद से तथा मेह का अर्थ 'मूत्र' से है।
आयुर्वेद में मधुमेह को वतज मेह के रूप में भी जानते है ,वात हवा और सूखापन प्रतीक एक आयुर्वेदिक हास्य है इसके अनुसार मधुमेह शरीर के प्रमुख अंगों को प्रभावित करता है,
आयुर्वेद के अनुसार मधुमेह का मुख्य लक्षण पाचन तंत्र में असामान्य परिवर्तन होना एवं इंसुलीन के स्त्राव में कमी का होना इत्यादि .आयुर्वेद यह कहता है की मधुमेह का उपचार सिर्फ दवा और पर्याप्त आहार के सेवन से किया जा सकता है. आयुर्वेद यह भी कहता है की यदि मधुमेह का उपचार का समय से नहीं किया जाये तो यह आंख की समस्याओं, जोड़ों में दर्द, नपुंसकता, गुर्दे की विफलता, और भी विभिन्न प्रकार की कई जटिलताओं को जन्म दे सकता, क्योंकि मधुमेह को एक महारोग के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
आहार और जीवन शैली सलाह
1. गेहूं की रोटी,पास्ता,भूरे चावल इत्यादि का सेवन करना चाहिए7
2. दूध के साथ तैयार पनीर और दही लिया जा सकता है.7
3. लहसुन, प्याज, करेला, पालक, कच्चा केला, और काले बेर का प्रयोग करें7
4. मीठा, खट्टा, और नमकीन खाद्य पदार्थ, आलू, शकरकंद, ताजा अनाज और दालों (फलियां), (वसा में उच्च) पूरे दही, और, भारी तेल और मसालेदार भोजन से बचें7
5. अनानास, अंगूर, आम, आदि मीठे फलों से बचें7
6. प्रतिदिन 340-40 मिनट तक व्यायाम करे 7
7. दिन के समय सोने से बचे 7
घरेलू उपचार
1. दिन में एक बार 2 चम्मच करेले के रास का सेवन करें
2. दिन में दो बार 1 चम्मच मेथी के पाउडर का सेवन पानी के साथ अवश्य करें
3. दिन में एक बार 2 चम्मच कड़वी लौकी के रस को एक चम्मच आंवला के रास के साथ मिलकर कर सेवन करें