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धान की खरीद का एक अक्टूबर से बायकॉट करेंगी खरीद एजेंसियां

7 वर्ष पहले
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चंडीगढ़। पैडी में नमी की मिकदार १५ फीसदी से कम करके १४ फीसदी करने से शैलर मालिकों की धमकी झेल रही बादल सरकार पर अब पांच खरीद एजेंसियों ने पैडी की खरीद न करने का एक और वज्रपात कर दिया है। पांचों खरीद एजेंसियों ने ऐलान किया है कि वह पंजाब में एक अक्टूबर से शुरू होने वाली खरीद का बायकॉट करेंगी। एजेंसियों के कर्मचारी गेहूं पर नमी का गेन के नाम पर कर्मचारियों पर करोड़ों रुपए की रिकवरी डाली जा रही है। एक -एक कर्मचारी पर बीस से साठ करोड़ रुपए तक की रिकवरी डाल दी गई है ।
पांचों खरीद एजेंसियों की ज्वाइंट कमेटी के प्रधान भूपेंद्र सिंह ने कहा, यह बहुत बड़ा फैसला है लेकिन हम ऐन मौके पर ये फैसला लेने को मजबूर हैं क्योंकि एडहॉक पालिसी होने के बावजूद सरकार कर्मचारियों पर करोड़ों रुपए की रिकवरी डाल रही है। यही नहीं, गेन के लिए २०११ में एक कमेटी बनी जिसमें यह सिफारिश की गई कि चूंकि गेहूं में कितना गेन कब आएगा, कितना आएगा इसका कुछ नहीं कहा जा सकता । इसके बावजूद कर्मचारियों पर करोड़ों रुपए डालना कहां तक तर्कसंगत है। भूपेंद्र सिंह ने कहा, पांचों एजेंसियों में एक भी फील्ड कर्मचारी नहीं होगा जिस पर करोड़ों रुपए की रिकवरी नहीं पड़ी हुई है।
क्या है गेहूं पर गेन
बारिशों के कारण बढ़ने वाली नमी के कारण गोदामों और ओपन में रखे अनाज का वजन बढ़ जाता है। एफसीआई ने गेन की एक एडहॉक पालिसी बनाई हुई है जिसमें कहा गया है कि गोदाम में पड़ी फसल का एक किलो और ओपन में पड़ी फसल का ७०० ग्राम गेन एफसीआई काटेगी। एफसीआई के काटने पर खरीद एजेंसियों की मैनेजमेंट कर्मचारियों से ये गेन काट लेती है। चूंकि हर साल एक करोड़ टन से ज्यादा गेहूं की खरीद होती है ऐसे में करोड़ों रुपए की रिकवरी कर्मचारियों पर पड़ रही है। कर्मचारियों को रिटायर होने पर कोई बेनीफिट नहीं मिल रहा है।
क्या होगा बायकॉट का असर
चूंकि आज से १५ दिन बाद मंडियों में धान आनी शुरू हो जाएगी और यदि मंडियों में इसकी खरीद करने के लिए कर्मचारी न रहे तो दिक्कतें आ सकती हैं। खरीद एजेंसियों के इंस्पेक्टर ही धान खरीदकर इसकी तुलाई और ढुलाई का काम करते हैं और उसके बाद इसे शैलरों में भिजवाया जाता है। यदि ऐसा न हुआ तो मंडियों में गल्ट आ सकता है और खरीद न होने से परेशान किसान आवाजाई रोक सकते हैं। भूपेंद्र सिंह ने कहा, एक अक्टूबर को खरीद करने की बजाए पांचों एजेंसियों के कर्मचारी चंडीगढ़ के रैली ग्राउंड में रैली करेंगे।
छह एजेंसियों खरीदती हैं १५५ लाख टन धान
एफसीआई समेत छह खरीद एजेंसियां पनसप, पंजाब एग्रो, मार्कफैड, पनग्रेन और वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन पंजाब की विभिन्न मंडियों से धान खरीदती हैं। एफसीआई का कोटा बीस फीसदी है लेकिन वह दस फीसदी से ज्यादा खरीद नहीं करती। यानी ९० फीसदी खरीद के लिए स्टेट एजेंसियों पर ही सरकार निर्भर करती है।