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कश्मीर घाटी में फंसे बुजुर्ग परमिंदर देवराज १५ दिन बाद सलामत लौटे

7 वर्ष पहले
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(घर लौटने पर बच्चों के साथ परमिंदर देवराज व देवराज सिंह )
चंडीगढ़/डेराबस्सी। कश्मीर घाटी में तेज बारिश और और चारों ओर बर्बादी का मंजर देखकर वापस सलामत लौटने की उम्मीद धुंधला रही थीं। उसे पुनर्जिवित किया भारतीय सेना और स्थानीय मुस्लिम परिवारों ने। ऊंचाई पर बसे इन परिवारों ने पांच दिन अपने घरों में शरण देकर ड्राई ताजा फ्रूट से मेहमान नवाजी की, वहीं श्रीनगर में हफ्ते भर तक सेना द्वारा वितरित बेशुमार फूड पैकेट्स के सहारे जिंदा रहे। यह कहना था बाढ़ प्रभावित कश्मीर घाटी से 15 दिन बाद सकुशल घर लौटी डेराबस्सी की बुजुर्ग जोड़ी परमिंदर देवराज का।

डेराबस्सी के आदर्शनगर में पड़ोसी 72 वर्षीय रिटायर्ड फ्लाइंग अफसर देवराज सिंह और रोडवेज रिटायर्ड 65 वर्षीय परमिंदर पाल सोमवार तड़के चार बजे अपने घर लौट आए। भारी बारिश लबालब पानी में दस दिन घिरे रहकर जो तबाही मंजर उन्होंने देखा, वह सपने में उन्हें भयभीत कर रहा है। ताउम्र भूलने वाला यह तजुर्बा उन्होंने भास्कर से साझा किया। उन्होंने स्टिल वीडियो फुटेज भी दिखाई जो उन्होंने ट्रक के कैबिन में फंसे रहकर अपने सेलफोन में कैद की थी। दोनों को 30 अगस्त को मनाली के रास्ते वाया रोड लेह के निकट पत्थर साहिब गुरुद्वारा के दर्शन करने गए थे।

छह सितंबर से पूरा एक हफ्ता दोनों बशिर उसके बेटे के साथ ट्रक में रहे। केवल निवाले ही साझा नहीं किए, इकट्ठे दिनरात गुजारे। एक दूसरे के पेशे, परिवार रहन सहन के हालात को करीब से जाना। बकौल देवराज परमिंदर, सैकड़ों मील तय करने पर भी बशिर ने उनका साथ नहीं छोड़ा, बल्कि उन्होंने बशिर को लौटा दिया। एक समय ऐसा आया जब पुल पर पहाड़ गिरने से रास्ता बंद हो गया। उस पार पहुंचने के लिए पहाड़ पार करना जरुरी था। फिसलन भरे पहाड़ों पर पैरों के बने अड्डों पर पैर फंसाकर रस्सी के सहारे चढ़ना था। स्थानीय लोगों ने उन्हें मना किया पर वे नहीं माने। बूढ़े शरीर फूलती सांसों के साथ उन्होंने रुककर आधे घंटे का सफर दो घंटों में तय किया।

आगे की स्लाइड्स पर देखे तस्वीरें।