चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी स्थित आईसीएसएसआर में सोशल साइंटिस्ट्स और रिसर्च स्कॉलर्स की वर्कशॉप के दूसरे दिन प्रो बीएस घुम्मन ने इस वर्कशॉप की शुरूआत के सफर को साझा किया।
उन्होंने बताया कि शताब्दी में चंडीगढ़ से दिल्ली जाते हुए एक साइंटिस्ट से बात करते हुए लगा कि साइंस के टीचर्स और स्टूडेंट्स रिसर्च के तरीकों में माहिर होते हैं जबकि सोशल साइंसेज में थोड़ी दिक्कत रहती है। साइंस की बेसिक पढ़ाई के दौरान कहीं ना कहीं मैथडोलॉजी भी एक हिस्सा रहती है। हम इसे सोशल साइंटिस्ट के लिए भी चाहते थे।
इस तरह वहीं पर बैठे-बैठे इस वर्कशॉप का खाका तैयार हुआ और 2006 में आईसीएसएसआर का ऑनरेरी डायरेक्टर रहते हुए उन्होंने पहली वर्कशॉप कराई। मंगलवार को प्रो घुम्मन ने स्टूडेंट्स को हाइपोथीसिस लिखने की कला सिखाई। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा रिसर्च को पढ़ने के बाद, उस रिसर्च में अनसुलझे रह गए सवाल तलाशने को कहा जिन पर आगे रिसर्च की जानी चाहिए। ये ओरिजनल सब्जेक्ट होंगे और किसी की कंटीन्यू रिसर्च नहीं करनी होगी। एमडीयू रोहतक से प्रो नीना सिंह ने लिट्रेचर रिव्यू करने के बारे में बताया।