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दलितों की सामाजिक बराबरी के लिए कोई धर्म नहीं है इलाज

7 वर्ष पहले
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चंडीगढ़। हिंदु धर्म की दी हुई परंपराओं और सिख धर्म में भी महत्वपूर्ण हो गई जाति को देखते हुए हमें लगता है कि एक अलग धर्म की जरूरत है। सामाजिक बराबरी के लिए दलितों को अपना एक अपना अलग रहन-सहन तैयार करना होगा। ये कहना था राजिंदर का। पंजाब यूनिवर्सिटी के पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट के स्टूडेंट राजिंदर ने अंबेडकर एसोसिएशन के स्थापना दिवस पर गांधी भवन में कराए गए प्रोग्राम में कहा कि शिक्षा के जरिए ही सामाजिक बराबरी संभव है। एसोसिएशन के प्रेसिडेंट गुरदीप ने कहा कि भीम राव अंबेडकर की विचारधारा में ही दलितों का उद्धार है।