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अगर आपका बच्चा जोड़ों के दर्द से है परेशान, तो पढ़ें कुछ जरूरी बातें!

7 वर्ष पहले
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चंडीगढ़। यदि आपका शिशु सुबह शरीर में अकडऩ के साथ उठता है और जोड़ों में दर्द और बार बार बुखार आने की शिकायत करता है तो इस बात की संभावना है की वह ज्यूवेनाइल रुमोटाइड आर्थराइटस का शिकार हो। इस रोग के उपचार के लिए दर्द निवारक औषधि और स्टीरॉयड का उपयोग बच्चों के लिए हानिकारक हो सकता है जबकि आयुर्वेद में सुरक्षित और अधिक प्रभावकारी विकल्प उपलब्ध है। 12 वर्ष से काम आयु के बच्चों में यह रोग अधिक पाया जाता है और लड़कों की अपेक्षा लड़कियों में यह समस्या ज्यादा पाई जाती है।

जीवा आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर प्रताप चौहान के अनुसारजे. आर. ए. ( ज्यूवेनाइल रुमोटाइड आर्थराइटस) एक ऑटोइम्यून रोग है जो जोड़ों पर अपना प्रभाव डालती है। अन्य ऑटोइम्यून रोगों की भांति इस रोग के मूल कारण से आधुनिक विज्ञान अनभिज्ञ है। कैसे पता लगाया जाये की आपके बच्चे को जे. आर. ए. है ? कुछ मामलों में जे. आर. ए. इन्फ्लुएन्जा से शुरू हो सकता है जैसे की ज्वर जोकि प्रतिदिन एक या दो बार दिन में बदलाव दिखा सकता है कुछ अन्य मामलों में बच्चों में निम्नलिखित लक्षण पाये है।

1. भूख की कमी और आलस्य
2. सुबह शरीर की जकडऩ
3. पुरे शरीर के जोड़ों में दर्द और सूजन

कुछ दिनों में बुखार उतर जाता है किंतु अन्य लक्षण कायम रहते है यदि सही प्रकार से उपचार नहीं किया गया तो जे. आर. ए. के कारण और अधिक जटिलताएं हो सकती है जैसी की जोड़ों का नष्ट होना ,मांसपेशियों में कमजोरी अथवा मांसपेशियों की हानि , ऑस्टियोपोरोसिस और आंखों की समस्याएं।

आपके बच्चे को खतरा कैसे हो सकता है?
इस रोग के बढऩे के मुख्य रूप से दो कारण है। आम का अधिक मात्रा में संचित हो जाना और वात दोष का बिगड़ जाना। यदि आपके बच्चे की जठराग्नि ( पाचन अग्नि) कमजोर है किंतु वास उन पदार्थों को खता है जो पचाने में भारी होते है , तो आपके बच्चे को खतरा हो सकता है
कमजोर जठराग्नि इन्हे पचने में असमर्थ होती है और इस कारण शरीर के बहुत से चैनल्स को रोकना शुरू कर देते है।

पाचन के बाद सबसे पहले जो धातु बनती है उसे रास धातु कहा जाता है, कमजोर पाचन तंत्र वाले व्यक्ति में यह धातु अनपचे आम से भरपूर होती है। यदि आपके बच्चे में भूख की कमी रहती है शरीर में सुबह के समय जकडऩ और आलस्य रास धातु में आम की उपस्थित को दर्शाता है।

जे. आर. ए. के मुख्य कारणः
1. वात दोष में गड़बड़ी
2. बढ़ा हुआ वात आम को शरीर के विभिन्न जोड़ों में ले जाता है
3. शरीर में जकडऩ, सूजन और दर्द
4. शरीर आम को पचाने की कोशिश करता है और बंद पड़े चैनल्स को खोलता है
5. शरीर अग्नि तत्व को सभी चैनल्स में भेजता है जिससे शरीर का तापमान बढ़ता है और बुखार आता है

जे. आर. ए. के उपचार के लिए आयुर्वेद में एक विस्तृत समझ, डाइग्नोसिस और उपचार उपलब्ध होने के कारण यह अन्य आधुनिक औषधियों की तुलना में एक प्रभावी विकल्प है। आपके शिशु को प्राकृतिक, समग्र और रोगी - केंद्रित उपचार से लाभ प्राप्त होगा, जोकि लम्बे अरसे में बिना किसी साइड - इफेक्ट के अधिकतम लाभ पहुंचता है। बहुत सी औषधियां और जड़ी बूटियां है जो की पाचन अग्नि की तीव्रता को बढ़ाती है आम को पचती है और इस रोग में बढ़े हुए वात को शांत करती है।