चंडीगढ़। गवर्नमेंट हॉस्पिटल में कहने को तो सब कुछ है फ्री लेकिन फ्री कुछ भी नहीं। सरकारी काम कराना है तो बाबूओं के चक्कर पर चक्कर काटने के बाद पैसे की खनक से होता काम। ये था गुरशरण सिंह भाजी यानि भाई मन्ना सिंह का नाटक तमाशा-ए-हिंदुस्तान।
हिंदुस्तान के आम आदमी के दर्द को बयान करता और आम आदमी की गैर आम चुप्पी पर चोट करते इस नाटक का मंचन पंजाब यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट ऑफ इंडिया (एसएफआई) की ओर से कराया गया।
शहीद भगत सिंह के 28 सितंबर को आ रहे जन्मदिवस को समर्पित इस नुक्कड़ नाटक मेले में तमाशा ए हिंदुस्तान की तीन प्रस्तुतियां हुईं। इसमें पुलिस के आम आदमी पर होने वाले अत्याचार से लेकर डॉक्टरों की लापरवाही तक का निशाना बनाया गया था।