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गोल्ड के लिए पंजाब और हरियाणा से आस

7 वर्ष पहले
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चंडीगढ़। एशियन गेम्स से पहले ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने १५ गोल्ड सहित कुल ६४ मेडल जीत कर ५वां रैक हासिल किया था। लेकिन १९ सितंबर से शुरू हुए इंचियोन एशियन गेम्स में अभी तक भारत केवल १ गोल्ड ही जीत पाया। अब सभी की नजरें कुश्ती और बॉक्सिंग पर लगी हैं जिसमें पंजाब और हरियाणा के खिलाड़ियों से उम्मीदें हैं। आखिर कुछ दिन पहले तक १५ गोल्ड जीतने वाले भारत के खिलाड़ियों को एशियन गेम्स में क्या हो गया। भारतीय खेल जगत में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है।
हालांकि यह पहले से लग रहा था कि कॉमनवेल्थ के मुकाबले एशियन गेम्स ज्यादा टफ होते हैं लेकिन इतने भी नहीं कि हम एक सप्ताह तक सिर्फ १ ही गोल्ड जीत पाएं। जबकि मंगोलिया जैसे देश भी ४ गोल्ड जीत कर हमसे आगे चल रहे हैं। शूटर जीतू राय ने पहले ही दिन गोल्ड जीत कर जो बेहतरीन आगाज किया था वह अब बाकी खेलों में फीका पड़ता जा रहा है। खेलों में गोल्ड मेडल ही उस देश के खेलों की तरक्की और एथलीट्स के दमखम का परिचय करवाते हैं। एशियन गेम्स के बाद खुद खिलाड़ी और फेडरेशंस को इस सवाल को खोजना होगा। क्योंकि २०१६ रियो ओलंपिक अब ज्यादा दूर नहीं है।
एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, कुश्ती से आस: एशियन गेम्स में अब भारत की उम्मीदें कुछ खेलों में ही रह गई हैं। इनमें बॉक्सिंग के अलावा एथलेटिक्स और कुश्ती शामिल हैं। बॉक्सिंग में शिवा थापा, देवेंद्रो सिंह, अखिल कुमार, मनदीप जांगड़ा, कुलदीप सिंह ने अपने मुकाबले जीत कर उम्मीदें कायम रखी हैं। इनमें शिवा थापा क्वार्टर फाइनल में जगह बना चुके हैं। महिलाओं में मेरी कोम के अलाव सरिता देवी और पूजा रानी भी शनिवार से रिंग में उतरेंगी। शनिवार से ही एथलेटिक्स के मुकाबले भी शुरू हो जाएंगे और ट्रिपल जंपर पंजाब के अरपिंदर सिंह गोल्ड के दावेदारों में शुमार हैं। इसके अलावा टिंटू लुका और विकास गौड़ा भी सुनहरी रंग को हासिल करने की कोशिश करेंगे।
तीरंदाजी में भारतीय महिलाओं ने अपनी दावेदारी अभी तक कायम रखी है और देखना होगा कि वह गोल्ड जीत पाएंगी या नहीं। कुश्ती के मुकाबले अभी शुरू होने बाकी हैं। ओलंपिक कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त खुद सिर्फ और सिर्फ गोल्ड पर दांव आजमाएंगे। इसके अलावा बजरंग पूनिया, अमित कुमार के अलावा महिलाओं में बबीता कुमारी, विनेश भी कॉमनवेल्थ जैसी सफलता यहां दोहराना चाहेंगे।