चंडीगढ़। मेरा हौसला किसी चट्टान से कम नहीं। मेरी कामयाबी का पहाड़ सिर्फ मैंने नहीं बनाया। इसमें मुझे हजारों हाथों ने साथ दिया। ये वो हाथ थे जिनके अागे मैं कभी हाथ भी नहीं जोड़ सका। लेकिन आज भी ये मेरे साथ हैं। ये हाथ इसलिए बढ़े क्योंकि मैंने अपने अंदर कभी हार न मानने का जज्बा पैदा किया। ये कहना है देश के श्रेष्ठ पैरा एथलीट्स में से एक पैरालंपियन अर्जुन अवॉर्डी अमित सरोहा ने। अमित यहां चंडीगढ़ में हॉलमार्क स्कूल के एनुअल फंक्शन पर बतौर गेस्ट ऑफ ऑनर मौजूद थे। अमित ने यहां पर बच्चों को गेम्स से जुड़ने के लिए प्रेरित तो किया ही वहीं उन्हें अनुशासन बनाए रखने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि वे आज जो भी हैं अपने अनुशासन के कारण ही हैं। इसी की वजह से उन्होंने न तो कभी अपनी प्रेक्टिस छोड़ी और न ही जीवन जीने का अंदाज। 2007 में चलने फिरने की शक्ति गंवाने वाले अमित आज दुनिया भर में हौसले की एक मिसाल हैं। छाटे से करियर में बड़ी उपलब्धियां पाने वाले अमित ने बच्चों को अपने लक्ष्य के लिए प्रेरित किया और खेलों से जुड़े रहने की भी सलाह दी।
सुशील ने आज जक सिनेमा हॉल नहीं देखा: अमित ने देश के स्टार रेसलर
सुशील कुमार के बारे में बच्चों को एक बात कही। उन्होंने बताया कि सुशील आज दुनिया भर में मशहूर हैं लेकिन उन्होंने कभी सिनेमा हॉल को अंदर से नहीं देखा। इस बात से सभी हैरान जरूर होंगे लेकिन ये सच है। उनका मानना है कि ये उनके अनुशासन को तोड़ सकता है। आप भी ऐसा काम न करें जो आपको अपने करियर के लिए बाधा लगे।