चंडीगढ़। किसने कहा आपको कि बिजनेस आसान है। अपने पिता जी से कभी पूछिएगा। इंटरप्रिनियोरशिप भी इश्क की तरह एक आग का दरिया है जिसमें डूब कर जाना होता है। पंजाब यूनिवर्सिटी स्थित यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (यूआईईटी) में ऐसी ही बातों के साथ मोटिवेट किया धीरेंद्र तायल ने। उनके साथ कई एक्सपर्ट थे जिन्होंने स्टूडेंट्स को स्टार्ट अप के लिए गाइड किया।
एक स्टूडेंट का कहना था कि एनजीओ और आशा वर्कर्स जैसे लोग जो समाज भलाई का काम कर रहे हैं, उनकी एक ज्वाइंट चेन बना कर बेरोजगारी दूर हो सकती है। उन्हें पता रहता है कि कहां पर क्या जरूरत है, ऐसे में सर्वे का उपयोग करने के लिए हो सकता है। एरिया के हिसाब से ही रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं और इंटरप्रिनियोर खुद भी कमा सकते है। तायल ने जहां इस आइडिया को वेग करार दिया, वहीं कुछेक का मानना था कि ये इनोवेटिव कोशिश हो सकती है। इसको पहले पेपर्स में प्रोजेक्ट के तौर पर लिखें और देखें कि कितनी पूंजी-कहां पर चाहिए और कैसे बचत होगी। वाकई अच्छा बिजनेस साबित हो सकता है।