चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री ने आज कहा कि मैं इस मुद्दे को विशेष रूप से उठा रहा हूं कि दिल्ली की पानी की बढ़ती हुई मांग को पूरा करना केवल हरियाणा का दायित्व नहीं समझा जाना चाहिए बल्कि दूसरे राज्यों को भी दिल्ली की पानी की आवश्यकता को पूरा करना चाहिए।
मुख्यमंत्री आज दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मेरा यह सुझाव भी है कि सभी अतंरराज्यीय नदियों को राष्ट्रीय संपदा मानते हुए हम अन्तर्राज्यीय झगड़ों को समाप्त करके राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपने को दृढ़ करें।ज् उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार पंजाब विधानसभा द्वारा पारित पंजाब समझौते निरस्तीकरण अधिनियम, 2004 को चुनौती देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में एक मुकदमा दायर करने जा रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना हरियाणा भूतल और भूमिगत जल संसाधनों के मामले में एक कमी वाला राज्य है। राज्य में भूमिगत जल स्तर विशेषकर, ताजे पानी के क्षेत्रों में भूजल का स्तर भूजल के भारी दोहन के कारण तेजी से नीचे जा रहा है। जल संरक्षण के लिए हरियाणा ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अनुसार बहुआयामी पहल की हैं, वर्ष 2015-16 में चार जिलों में पायलट आधार पर जिला सिंचाई योजनाएं तैयार की जानी प्रस्तावित हैं।
मुख्यमंत्री कहा कि हरियाणा सरकार सतलुज-यमुना लिंक कनाल और हांसी-बुटाना कनाल को शीघ्र पूरा करवाकर हरियाणा के किसानों और इसके लोगों को समुचित पानी उपलब्ध करवाने की उनकी न्यायोचित आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए वचनबद्ध है। हरियाणा सरकार ति-पक्षीय जल समझौते-1974 को एकतरफा समाप्त करने के मुद्दे पर शीघ्र सुनवाई करने और निर्णय करने के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय से आग्रह करने जा रही है। हरियाणा सरकार पंजाब विधान सभा द्वारा पारित च्पंजाब समझौते निरस्तीकरण अधिनियम-2004ज् को चुनौती देने के लिए एक मुकदमा दायर करने जा रही है।