चंडीगढ़। मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस टीबी एमडीआरटीबी के मरीजों के लिए राहत की खबर है। ऐसे मरीजों में एमडीआरटीबी का पता लगाने के लिए 2 से तीन महीने का टाइम नहीं लगेगा बल्कि 2 घंटे में इस बीमारी का पता लग सकता है।
जानिए कैसे जेन एक्सपर्ट मशीन लगाएगी पता...
-पीजीआई में सिर्फ दो घंटे में एमडीआरटीबी का पता लगाने वाली जेन एक्सपर्ट मशीन की सुविधा बुधवार को शुरू हो गई है।
-पीजीआई ये सुविधा शुरू करने वाला इस रीजन का पहला सरकारी हॉस्पिटल बन गया है। चंडीगढ़ के होम कम हेल्थ सेक्रेटरी अनुराग अग्रवाल, डायरेक्टर हेल्थ सर्विस डॉ. वीके गगनेजा और डॉ. डी बेहरा भी यहां मौजूद थे।
-डॉ. अनुराग अग्रवाल ने जेन एक्सपर्ट मशीन का उद्घाटन किया। अभी इस बीमारी का पता लगाने में हो रही देरी में मरीज का इलाज देरी से शुरू हो पाता था।
-इतनी ही बीमारी का पता देरी से लगने की वजह से टीबी का इंफेक्शन दूसरों में फैलने का रिस्क भी खत्म हो गया है।
-इस रीजन में पहली बार पीजीआई में एमडीआरटीबी के मरीजों के लिए इस सुविधा को शुरू कर दिया जाएगा।
दो से महीने का इंतजार खत्म
-पीजीआई के माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर और टीबी लेब के नोडल आफिसर डॉ. सुनील सेठी बताते हैं कि अभी कनवेंशनल तकनीक में मल्टी ड्रग रजिस्टेंस टीबी का पता लगाने में दो से महीने लगते हैं।
-क्योंकि पुरानी कनवेंशनल तकनीक से लेब में होने वाले टेस्ट इतना टाइम ले लेते हैं। लेकिन जेन एक्सपर्ट मशीन में एमडीआरटीबी के लक्षणों वाले मरीजों के सैंपल लेकर दो घंटे में बीमारी का पता लगा लिया जाता है।
-बीमारी का पता लगने के बाद मरीज को जरूरी दवाइयां देकर इलाज शुरू करना संभव है।
दूसरों में इंफेक्शन रोकना हुआ संभव
-एमडीआरटीबी होने के बावजूद बीमारी का दो से तीन महीने तक पता न लगने से दूसरों में भी ये बीमारी फैलने के बहुत चांस रहते हैं। क्योंकि एमडीआरटीबी का पता न लगने से मरीज का इंफेक्शन दूसरों में फैलने के चांस बहुत रहते हैं।
-लेकिन अब बीमारी का पता चलने पर एम डीआर टीबी का लंबा इलाज फौरन करना संभव हो गया है।
-सामान्य टीबी के मरीजों को तीन से छह महीने के इलाज की जरूरत रहती है। लेकिन एम डीआर टीबी के मरीजों को दो साल तक रोजाना 10 ड्रग लेनी होती है।
-लेकिन इतना लंबा इलाज बीच में ही छोडऩे की वजह से बीमारी ठीक भी नहीं होती। यही वजह है कि टीबी के कुल मरीजों में से 15 से 20 फीसदी मरीज एम डीआर टीबी के होते हैं।
-इन मरीजों में ये बीमारी पता करने के लिए ये मशीन मददगार साबित होगी।
डॉ. सेठी के प्रयासों से फ्री डायग्नोस
-अभी एमडीआरटीबी के मरीजों के डायग्नोस में 2 हजार का खर्च आता है। लेकिन पीजीआई में ये दो घंटे का डायग्नोस बिलकुल फ्री होगा।
-डॉ. सुनील सेठी ने पिछले तीन साल मॉलीक्यूलर तकनीक से टेस्ट करवाने वाली जेन एक्सपर्ट मशीन को लाने के प्रयास शुरू किए थे। लेकिन अब जाकर सेंट्रल टीबी डिवीजन की मदद से पीजीआई को ये सुविधा मिल पाई है।