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आरसी, ड्राइविंग लाइसेंस का कांट्रेक्ट देकर सरकार को 125 करोड़ की चपत

5 वर्ष पहले
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चंडीगढ़। पंजाब में आरसी बनाने का जो खर्च 136 रुपए है,उसी का छत्तीसगढ़ में रेट 74.70रुपए है। इसी तरह ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का पंजाब में 65 रुपए लिए जा रहे हैं जबकि गुजरात में 49 रुपए और यूपी व राजस्थान में 44.48 रुपए है।
दोनों ओर से पंजाब के लोगों को जा रहा है लूटा
-नेशनल रोड सेफ्टी काउंसिल के मेंबर डॉ कमलजीत सिंह सोही ने इसके पीछे 125 से 150 करोड़ रुपए का आरोप लगाया है और चीफ मिनिस्टर प्रकाश सिहं बादल से इसकी जांच सीबीआई से करवाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने कोई कार्यवाही न की तो वह अदालत में जनहित याचिका दायर करेंगे।

-उन्होंने बताया कि इसमें सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इस कंपनी के साथ सरकार का करार दिसंबर 2016 में पूरा होना था लेकिन ने डेढ़ साल पहले ही सरकार ने इसे पांच साल के लिए और बढ़ा दिया। मंशा साफ है कि करोड़ों रुपए कमाने मंत्रियों और अफसरों की जेबों में जाएंगे।
-उन्होंने बताया, केंद्र सरकार की अपनी एनआईसीएसआई कंपनी को इस प्रकार के काम अलॉट नहीं किए जा रहे जबकि इस सरकारी कंपनी के रेट तीन गुणा कम हैं और इन्हें टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा तक नहीं लेने दिया जा रहा है।
-आज यहां मीडिया से बात करते हुए डॉ कमलजीत सिहं सोही ने कहा, 2011 में स्मार्ट चिप कंपनी को आरसी और ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का मिला था जो 136 रुपए प्रति आरसी और 65 रुपए ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए दिया गया।
-जबकि सरकारी कंपनी एनआईसीएसआई कंपनी यही काम 44 रुपए के लगभग कर के दे रहा है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, सरकारी कंपनी ने टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया और मेरा मानना है कि ऐसा जान बूझकर किया गया है।
-डॉ सोही ने बताया कि पंजाब में हर साल दस लाख वाहन रजिस्टर्ड हो हैँ और इस अंतर से 6.17 करोड़ रुपए ज्यादा वसूल किए।
-ऐसे में 25 करोड़ रुपए का घोटाला अंजाम दिया जा चुका है। उन्होंने आगे बताया कि कंपनी का करार 2016 के दिसंबर में खत्म हो रहा है। पीआईडीबी जो इस काम की टेंडर प्रक्रिया को देखती है ने काम शुरू किया तो दो कंपनियों ने दोपहिया वाहनों के लिए जीरो रेट दिया और टॉस के जरिए इसका फैसला किया गया।
-फैसले में दूसरी कंपनी जीत गई लेकिन सरकार ने प्रक्रिया ही रद्द करके स्मार्ट चिप कंपनी को काम पुराने रेट्स पर अलॉट कर दिया।
-डॉ सोही ने बताया कि पंजाब के मामले में बेशक कंपनी को रेट का अंदाजा नहीं हुआ लेकिन अब तो दूसरे राज्यों के रेट सरकार को मालूम है, फिर क्यों ज्यादा रेट पंजाब के लोगों से लिए जा रहे हैं। डॉ सोही ने टेंडर को रद्द करने की मांग की और कहा कि नए सिरे से काम अलॉट किए जाएं।
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