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बीबी बुलबुल प्रोफेशनल रेसलिंग की रानी हैं

5 वर्ष पहले
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गौरव मारवाह. चंडीगढ़

डब्ल्यूडब्ल्यूई और टीएनए। विदेशी रेसलिंग हैं या इन्हें प्रोफेशनल रेसलिंग भी कहा जा सकता है। ये भारत की मिट्टी की कुश्ती से पूरी तरह से अगल है और इसी इसे भारतीय कुश्ती प्रेमियों में ढालना उससे भी मुश्किल काम। ये बात खली भी जानते हैं कि इसे भारतीय फैंस के बीच लडऩा बेहद मुश्किल काम है। खली ने डब्ल्यूडब्ल्यूई से कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद पंजाब के जालंधर में एकेडमी बनाई। जिस जगह को लोगों ने मैरिज पैसे बनाने को कहा था वहां खली ने एकेडमी बनाकर रेसलर तैयार कर दिए। इसमें वे हजारों खली पैदा करना चाहते हैं। खली की एक रेसलर इस समय खूब चर्चित है जिसका नाम बीबी बुलबुल है। बुलबुल देश की पहली डब्ल्यूडब्ल्यूई फॉर्मेट की रेसलर हैं।
खली की पाठशाला की पहली वुमन रेसलर्स बीबी बुलबुल हैं। बुलबुल खली को पिछले 15 सालों से जानती हैं और वे खली को अपना भाई मानती हैं। बुलबुल प्रोफेशनल रेसलर होने के साथ साथ रियल एस्टेट की एक सफल बिजनेस वुमन भी हैं। वे दिल्ली में अपना बिजनेस करती हैं। बुलबुल के पिता फौजी थे जो 16 साल पहले एक दुर्घटना में चल बसे। उसके बाद उनकी मां भी एक बीमारी के कारण उनका साथ छोड़ गईं। बुलबुल बचपन से ही हार नहीं मानने वाली लड़की थीं। उन्होंने परिस्थितियों का सामना किया और चंद पैसों से अपना बिजनेस शुरू किया। फौजी पिता की बेटी ने खुद को तो संभाला ही साथ में अपनी बहन की भी जिम्मेदार ली। उनकी बहन विवाहित हैं और अपने परिवार में सुखी भी। बुलबुल अब अपने सपने को सच करने की ओर बढ़ रही हैं जो डब्ल्यूडब्ल्यूई रिंग तक पहुंचने का है। बुलबुल पूर्व डब्ल्यूडब्ल्यूई रेसलर चाइना की दीवानी। चाइना महिलाओं को पस्त करने के बाद पुरुषों का सामना करती थीं, वैसे ही बुलबुल की भी छवि ऐसी ही है। दो साल से ट्रेनिंग ले रही बुलबुल से पुरुष रेसलर भी लडऩे से एक बार सोचते हैं। वे अपने सपने को साकार करने करने के लिए लगातार मेहनत कर रही हैं।

गुस्सा बर्दाश्त नहीं बुलबुल को:
बीबी बुलबुल का नाम भले ही कोमल सी चिडिय़ा का हो, लेकिन वे अपने नाम से पूरी तरह से उलट हैं। उन्हें गुस्सा बर्दाश्त नहीं है और इसी के कारण वे चर्चाओं में आई। एक दिन एकेडमी में गुस्से के कारण उन्होंने चैलेंज किया और कविता ने उसे मंजूर कर लिया। ये वीडियो इस कदर वायरल हुआ कि बुलबुल रातों रात स्टार बन गईं।

ऐसे होती है दो शिफ्टों में ट्रेनिंग
-दिन की शुरुआत कार्डियो एक्सरसाइज से होती है। 2 घंटे में टफनेस का लेवल बढ़ता जाता है। इसके बाद रेसलर्स को रिंग में लाया जाता है।
-जब रेसलर का शरीर और दिमाग गर्म हो जाए। तब मौका आता है उसे रिंग में उतारने का। दांव वैसे ही लगाने होते हैं अंडर टेकर-या रॉक लगाते हैं।
-इसके बाद एकबार फिर बारी है जिम जाने की। एक्सरसाइज और रेसलिंग का पुराना साथ, दो घंटे तक जिम में पसीना बहाना पड़ता है।
- ट्रेनिंग के लिए खली के अलावा यहां आठ ट्रेनर्स हैं। एक अमेरिकी कोच भी है जो अमेरिकी स्टाइल सिखाते हैं। वे 6-8 घंटे ट्रेनिंग देते हैं।

मॉनिटरिंग करते हैं खली:
द ग्रेट खली जब भी जालंधर में होते हैं तो वे सुबह 11 बजे एकेडमी आते हैं और रात 11 बजे तक पूरी 12 घंटे वे एकेडमी में ही बिताते हैं। खली किसी चुनिंदा रेससर्ल को नहीं बल्कि सभी को टिप्स देते हैं। मॉर्निंग और इवनिंग सेशन को खली अपने ऑफिस में बैठ कर मॉनिटरिंग करते हैं और जो भी गलत करता है उसे ठीक करने के लिए वहां पर पहुंचते हैं। जिम में खेली अपने रेसलर्स के साथ खुद वेट उठाते हैं और जो गलत करता है उसे दुरुस्त भी करते हैं। मॉर्निंग सेशन सुबह 6 बजे से शुरू होता है और इवनिंग सेशन खत्म होने का कोई समय नहीं है। इसे खत्म होते होते देर रात भी हो जाती है।

भारतीय पहलवानों को ट्रेन करने के लिए बाकायदा खली ने अमेरिकी कोच रखा है। अमेरिका में बड़े बड़े रेसलर्स को ट्रेन कर चुके मैट रेक्स यहां पर रेसलर्स को अमेरिकी रेसलिंग के पहलुओं से परिचय कराते हैं। रेक्स यहां रोजाना 6-8 घंटे ट्रेनिंग देते हैं।
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