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सेलिब्रेशन ऑफ लाइफ में हैं खुशी और गम का संगम<श्च></श्च> सेक्टर-9 के आर्ट फोलियो में शुरु हुई आर्टिस्ट मदन लाल की पेंटिंग एग्जिबीशन

9 वर्ष पहले
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चंडीगढ़।कभी खुशी तो कभी गम। दाएं और बाएं हाथ ही तरह हमेशा हमारे साथ-साथ रहते हैं और इन्हीं के साथ हम अपनी लाइफ एंजॉय भी करते हैं। आसान शब्दों में कहें तो इसे सेलिब्रेशन ऑफ लाइफ कहते हैं। और यही झलक रहा है सिटी बेस्ड आर्टिस्ट मदन लाल की पेंटिंग्स में। मंगलवार को सेक्टर-9 की आर्ट गैलरी 'आर्ट फोलियोÓ में उनकी एग्जिबीशन 'अर्बन मैथोलॉजीÓ शुरु हुई। यह 12 जनवरी तक चलेगी। इसमें मदन लाल के 14 आर्ट वर्क शामिल हैं।

मदन लाल की पेंटिंग्स में हर रंग झलकता है। लाल भी, हरा भी। खुशी का भी और उदासी का भी। इनकी हर पेंटिंग खूबसूरत भी है। मगर मदन लाल मानते हैं कि पेंटिंग को पसंद करने में सबसे अहम होता है देखने वाला कलाकार के उस समय के इमोशंस को समझे जब वह पेंटिंग बना रहा था। इसीलिए कला के सौंदर्य को पसंद करने वाला कोई भी जब उनके सामने आता है, तो वह निर्धारित रेट से कम में ही बेच देते हैं। 'अर्बन मैथोलॉजीÓ में क्या है? इसपर मदन लाल कहते हैं जिस तरह हमारी बॉडी में बहुत सी लेयर्स होती हैं, ठीक उसी तरह इन पेंटिंग्स में भी हैं। इसमें उनकी सोच और इमोशंस छिपे हैं। वह नेचर और म्यूजिक लवर हैं। इसलिए उनकी हर पेंटिंग में इससे जुड़ी चीजें शामिल होती हैं। आसपास होने वाली अलग-अलग घटनाओं को ही वह कैनवास पर उकेरते हैं। डिश एंटीना, ऐपल,लाइट्स, बेल। सभी इनकी पेंटिंग्स का हिस्सा हैं। लगभग सभी पेंटिंग्स में ज्योमेट्रिकल फिगर्स हैं। इसकी वजह पूछने पर उन्होंने बताया कि यह फिगर्स स्पेस देती हैं। दूसरा उनपर कार्बुजिए के काम का भी काफी असर है और वह चंडीगढ़ से बहुत इंसपायर्ड हैं। थोड़ा डिटेल में बात करें तो मदन लाल के मुताबिक कुछ भी अच्छा करने के लिए हमें ब्रेक चाहिए। बुरा-बुरा हो रहा है, तो सब छोड़कर एक तरफ बैठ जाओ। इसके बाद जो होगा अच्छा ही होगा क्योंकि दिमाग शांत और सोचने की मुद्रा में आ जाता है। पेंटिंग बनाते-बनाते जब ब्लॉकेज (कंफ्यूजन)हो जाती है तो वह कुछ देर के लिए रंग और ब्रश छोड़ देते हैं। मदन लाल कहते हैं कि रूटीन टेंशंस या समाज में घटती घटनाओं से वह जब परेशान होते हैं तो उनके दिमाग में ब्लॉकेज हो जाती है।

मदन लाल कहते हैं कि चंडीगढ़ में आर्टिस्ट्स और आर्ट लवर्स की सोच में काफी बदलाव आया है। शहरवासी आर्ट में इंवेस्ट करने लगे हैं मगर दुख की बात यह है कि अभी भी थिएटर आर्टिस्ट, लेखक और पेंटर। आपस में तालमेल मिलाकर नहीं काम करते हैं। अपने साथ दूसरे को काम करने का मौका ही नहीं देते। ऐसा करेंगे तो रिजल्ट और भी अच्छे होंगे। मदन लाल मोहाली के एनआईआईएफटी में ड्रॉइंग और स्केचिंग पढ़ाते हैं। देश विदेश में उनके 15 सोलो शो ऑर्गनाइज हो चुके हैं। इस एग्जिबीशन के बाद उनकी पेंटिंग की यह सीरिज मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलरी में लगाई जाएगी।