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सरकारी मंजूरी रोक कर हो सकता है आरटीई लागू

9 वर्ष पहले
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चंडीगढ़। प्राइवेट स्कूल कोई भी नियम लागू करने से इस आधार पर इनकार नहीं कर सकते हैं कि हमें सरकारी मदद नहीं मिलती। राज्य ने उन्हें स्कूल चलाने के लिए मंजूरी तो दी है। वह बिना मंजूरी के नहीं चल सकते। इस मंजूरी को लेने के लिए उन्हें सरकार के नियम और कानून लागू करने ही होंगे। यह कहना रहा प्रो वीरेंद्र कुमार का। वह आई सीएसएसआर में राइट टू एजुकेशन के ऊपर सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। प्रो वीरेंद्र ने शिक्षा के मसलों पर अदालतों के प्रयास, उनके विभिन्न निर्णयों, आरटीई एक्ट 2009 और अदालतों के स्तर पर हो रही कुछ लापरवाही का भी जिक्र किया।
प्रो वरिंद्र ने कहा कि शिक्षा संस्थानों को राज्य की मंजूरी जरूरी है, यह याद रखना चाहिए। उन्होंने हाई कोर्ट द्वारा गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को प्रति स्टूडेंट पांच हजार रुपये जुर्माना करने का उदाहरण भी दिया। सैकुलर एजुकेशन होनी चाहिए। माइनॉरिटी के नाम पर चल रही शिक्षा संबंधित कमर्शियल एक्टिविटीज को बढ़ावा देने की बजाए इसे रोकना होगा।
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एसएस निज्जर ने कहा कि विवेकानंद ने सही कहा था कि शिक्षा रगों में दौड़ते खून की तरह जरूरी है। प्लेटो तो तीसरी सदी में ही इसका महत्व जानते है इसलिए उन्होंने यूनिवर्सिटी की स्थापना की। उन्होंने प्रो वीरेंद्र के लेक्चर पर बोलते हुए कहा कि ऐसे कई मुद्दे उठाए गए हैं जिनके बारे में कई बार जज भी नहीं सोचते। जज सिर्फ केस का निर्णय करते हैं और उसी परिप्रेक्ष्य में धारा को देखते हैं। यह सही है कि कई बड़ी जगह पर यदि राज्य का शिक्षा अधिकार नहीं देते तो कोई भी व्यक्ति कोर्ट जा सकता है। आरटीई की जरूरत सबसे ज्यादा गांव में हैं। उन्होंने कहा कि इस कानून के जरिए समाज में बदलाव आने में सालों लगेंगे।
जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट से जस्टिस एमएम कुमार ने कहा कि प्रोफेसर्स की जिम्मेदारी बनती है कि वह अदालतों के निर्णयों को लेकर अपने सुझाव दें। कहां किस निर्णय पर, गलती हुई है और किस कानून का दुरुपयोग हो रहा है, यह प्रोफेसर्स बता सकते हैं। इन मुद्दों पर डिबेट होना चाहिए। आरटीई के मसले में यदि स्कूल यह कहते हैं कि हमें एड नहीं मिलती है और हम माइनॉरिटी हैं तो यह ठीक नहीं क्योंकि उन्हें प्लॉट सरकार ने ही दिए हैं। यह भी सरकारी सहायता के अंतर्गत ही आएगा। शिक्षा के जरिए ही लोकतंत्र मजबूत होगा और इकोनॉमी ठीक होगी। वीसी प्रो एके ग्रोवर, संगीत टीचर प्रो नीरा ग्रोवर एवं प्रो सुरिंदर कलेर शुक्ला भी इस मौके पर मौजूद थे।