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औरत ही समझे औरत को बेहतर: एंजॉली

9 वर्ष पहले
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चंडीगढ़। काली साड़ी के साथ कढ़ाई वाला लंबा काला कोट, गले और कान में पल्र्स और दाएं हाथ में ब्लैक स्टोन की अंगूठी और हाथ में ब्लैक पोटली। यह हैं पद्मश्री आर्टिस्ट एंजॉली इला मेनन। सोमवार को गवर्नमेंट म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी में चंडीगढ़ ललित कला अकादमी द्वारा ऑर्गनाइज अमृता शेरगिल नेशनल आर्ट वीक में पहुंचीं। इस प्रोग्रैम में आर्ट राइटर और पेंटर जे स्वामीनाथन के बेटे एस कालीदास भी मौजूद थे।


सबसे पहले चंडीगढ़ की तारीफ में बोलीं और फिर इंटरनेशनल मैप पर चंडीगढ़ का नाम बनाने वाले कार्बूजिए और रॉक गार्डन के निर्माता नेक चंद पर। एंजॉली का ज्यादातर आर्ट वर्क आसपास के लोगों पर ही आधारित होता है। जिन लोगों को कई बार हम नजरअंदाज कर देते हैं, एंजॉली उन्हीं को खूबसूरती से पेंट कर देती हैं। खासतौर से उन्हें जो हमारी जिंदगी के बेहद करीब भी होते हैं। इनमें चरवाहे, अखबार बेचने वाला एक परिवार, कारपेंटर आदि शामिल हैं। एंजॉली के आर्ट वर्क में माइथोलॉजिकल फिगर्स भी शामिल हैं। इन्होंने अपने बहुत से आर्ट वर्क में कोआ को भी शामिल किया है।


वहीं फीमेल की न्यूड फिगर्स को भी एंजॉली ने एक अलग नजरिए से पेश किया है। वह बताती हैं कि दस साल तक उन्होंने फीमेल की न्यूड फिगर्स को पेंट किया है। इसकी वजह है कि एक औरत दूसरी औरत में खुद को देख सकती है। इसलिए औरत ही औरत को खूबसूरत और अलग दिखा सकती है। एंजॉली ने बताया कि उनके समय में कलाकारों के पास अपनी कला को निखारने या फिर कुछ नया सीखने के माध्यम नहीं होते थे। मगर आज इंटरनेट ने सब आसान कर दिया है। साल 1998 में उनके बेटे ने खुद एंजॉली से उनके आर्ट वर्क में एक्सपेरिमेंट या कुछ नया करने के लिए कंप्यूटर यूज करने की सलाह दी थी।



एंजॉली बताती हैं कि रंगों को शेप देने के लिए ही वह आर्टवर्क बनाती हैं। वह पेंटिंग को ड्रॉ कम और पेंट ज्यादा करती हैं। देश में आर्ट की स्थित पर वह कहती हैं कि यहां आर्ट सिखाने के लिए प्रशिक्षित टीचर ही नहीं हैं। स्टूडेंट्स से पहले जरूरत है टीचर्स को ड्रॉइंग सिखाने की। वह कहती हैं कि अपने देश में आर्ट सिखाने के लिए कम-से-कम 10 मिलियन आर्ट स्कूल और आधा मिलियन ट्रेंड आर्ट टीचर्स की जरूरत है। एंजॉली ने बताया कि और कुछ नहीं तो हमें स्कूल स्टूडेंट्स को आर्ट की हिस्ट्री पढ़ाने के लिए सीडी की एक सीरिज तैयार करनी चाहिए। साथ ही देश के अलग-अलग शहरों में आर्ट शो भी ऑर्गनाइज किए जाने चाहिए। एंजॉली के मुताबिक यंग आर्टिस्ट्स काफी अच्छा काम कर रहे हैं। पुराने दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि इस साल पहले वह एक लेक्चर के लिए विदेश गईं तो वहां कला के नए आयामों के लिए आर्ट से जुड़े लोग चीन और कोरिया जैसे देशों पर नजरें गड़ाए हुए थे। तब मैने कहा था कि नया आइडिया भारत से ही आएगा। ऐसा हुआ भी। आर्टिस्ट सुबोध गुप्ता इसका उदाहरण हैं। वह अच्छा काम कर रहे हैं।



दर्द के हूं करीब

मैने दर्द भी पेंट किया है। फिर चाहे वह पाकिस्तान से भारत आने पर होमलेस होने का दर्द हो या फिर मुंबई की एक बस्ती में औरतों के हालातों का दर्द। जहां 18-20 साल के लड़के सिर्फ इसीलिए शादी करते हैं क्योंकि उन्हें दहेज में बाइक चाहिए। जिस बस्ती को मैने अपने ज्यादातर आर्टवर्क पेंट किए हैं, उसी बस्ती में मेरा एक स्टूडियो और एनजीओ है। एनजीओ का नाम 'ओमर इलाÓ मेरे माता पिता के नाम पर है। यहां बच्चों को 12वीं तक मुफ्त शिक्षा और गरीब औरतों को किरोशिया और टेलरिंग जैसे कोर्स कराए जाते हैं।




हर स्तर को उठना होगा , तभी होगी कला की पहचान:एस कालीदास

जब इंटरनेशनल मार्केट में स्टॉक एक्सचेंज का रेट बढ़ता है, आर्ट और आर्टिस्ट्स का रेट भी बढ़ता है। इसलिए कलाकारों को निराश होने की जरूरत नहीं है। अपने पिता जे स्वामीनाथन का उदाहरण देते हुए वह बोले कि साल 1950-1990 के दौरान उनके पिता के आर्ट वर्क की कीमत 20 गुणा बढ़ी। लेकिन कई बार उनकी पेंटिंग बिकती नहीं थी। ऐसे में वह पुरानी पेंटिंग को नया बनाकर बेचने की कोशिश करते थे। देश में आर्ट के प्रति लोगों की सोच पर कालीदास बोले कि यहां तो लोगों को अपने इतिहास की कद्र नहीं है। आर्ट की कद्र भी तभी होगी जब हमारे समाज का स्तर ऊंचा उठेगा और हर कला को बराबर