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साक्ष्यों के अभाव के चलते सेक्टर 32 अस्पताल के कम्यूनिटी मेडिसन के एचओडी बरी

9 वर्ष पहले
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चंडीगढ़। पांच वर्ष पूर्व गवर्नमेंट मेडिकल और अस्पताल(जीएमसीएच) सेक्टर 32 में एमबीबीएस थर्ड ईयर के छात्र जसप्रीत सिंह क ी आत्म हत्या के मामले में सेक्टर 32 अस्पताल के क यूनिटी मेडिसन के एचओडी डा. नवीन कृ ष्ण गोयल क ो मंगलवार को जिला अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। कृष्ण गोयल पर आत्म हत्या के लिए उकसाए साए जाने और आपराधिक साजिश रचने जाने के तहत मामला दर्ज कि या गया था। इसी के साथ ही उनपर जाति सूचक शब्द कहे जाने का आरोप भी था।

मामले के शुरू हुए ट्रायल के दौरान मृतक छात्र के पिता चरण सिंह ने अदालत में दिए बयान में अपने बेटे की लिखावट की पहचान किए जाने के साथ मृतक के दो अन्य साथी छात्र दीपक वशिष्ठ व अजय सिंह के खिलाफ के नाम भी लिए थे। जिनके नाम मृतक की जैक ट से बरामद सुसाइड नोट में लिखे हुए थे। अदालत में उक्त छात्रों के खिलाफ भी आरोप तय किए गए थे। जिन्होंने बाद में हाई क कोर्ट की शरण ली थी। हाई क कोर्ट ने छात्रों के नाम एफआईआर से निरस्त करने के निर्देश दिए थे।

क्या था मामला
28 जनवरी वर्ष 2008 के दायर मामले के अनुसार अस्पताल के क यूनिटी मेडिसन के एचओडी डा. नवीन क कृष्ण गोयल पर एमबीबीएस छात्र जसप्रीत सिंह को मानसिक रूप से प्रताडि़त कर उसे आत्म हत्या करने पर मजबूर किए जाने का आरोप था। मृतक को कम्यूनिटी मेडिसन विषय में महज एक नंबर से फेल कर दिया गया था। इस बारे में जब जसप्रीत डाक्टर से मुलाकात की तो उसे जाति सूचक शब्द कहक र उसे पास क रने से इंकार किए जाने का आरोप था।

परेशान होकर जसप्रीत ने 27 जनवरी की रात को कालेज की लाइब्रेरी के साथ बने बाथरूम में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसका शव लटका हुआ पाया गया था। इस बात का पता उस समय चला था जब जसप्रीत के देर शाम घर नही लौटने पर उसके माता-पिता उसकी तलाश में सेक्टर-32 अस्पताल में पंहुचे थे। जसप्रीत ने उन्हें बताया था कि उसने वहां सांस्कृतिक कार्यक्रम चल रहा है।

जब उसके माता-पिता अस्पताल में पंहुचे तो उन्होंने देखा जसप्रीत की जैकेट लाइब्रेरी में पड़ी थी और उसने लाइब्रेरी के साथ बने बाथरूम में फंदा लगाया हुआ था। घटना स्थल से चार घंटे बाद बरामद सुसाइड नोट में उसने खुद को जाति सूचक क हकर पास नही किए जाने का आरोप लगाया था। नोट में डाक्टर के अलावा अन्य दो छात्रों का भी जिक्र किया गया था। उन पर भी जातिसूचक टिप्पणी कर उसे परेशान किए जाने का आरोप लगाया गया था।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जसप्रीत के पेपर की पीजीआई से दोबारा जांच के लिए अर्जी अदालत में दायर की थी। अदालत से मंजूरी के बाद दुबारा जांच में वह पास पाया गया। उसे उक्त विषय में पास होने के लिए 30 में से 15 अंकों की जरूरत थी। लेकिन परीक्षा में उसे 14 अंक दिए गए थे। जबकि पीजीआई में रि-चैकिंग ग के बाद उसके 16.5 अंक आए। सीएफएसएल की रिपोर्ट में जसप्रीत की हैंडराइटिंग में उसकी लिखावट की पुष्टि हुई।