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जांभोजी के साहित्य को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए

9 वर्ष पहले
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डबवाली। चौटाला रोड स्थित भगवान जंभेश्वर मंदिर एवं बिश्नोई धर्मशाला में सोमवार को जांभाणी साहित्य अकादमी की ओर से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ। इसमें जोधपुर के पूर्व सांसद जसवंत बिश्नोई मुख्यातिथि थे जबकि छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकायुक्त एलसी भादू ने अध्यक्षता की।


मुख्यातिथि जसवंत बिश्नोई ने कहा कि जांभाणी साहित्य का महत्व सर्वजन सुखाय के लिए है और अकादमी की टीम भगवान जांभोजी के साहित्य को ढूंढकर संग्रहित करे। इस कार्य के लिए पूरा समाज अकादमी टीम का सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि जांभोजी के साहित्य को आमजन तक पहुंचाने में अकादमी वेबसाइट बनाए और उसका प्रचार-प्रसार करे।

विशिष्ठ अतिथि व अकादमी पदाधिकारियों डॉ. सरस्वती बिश्नोई बीकानेर व डॉ. बनवारी लाल हनुमानगढ़ ने कहा कि समाज में लड़के-लड़कियों को संस्कृति व साहित्य से जुड़ाव पैदा करने लिए माता पिता जांभाणी साहित्य का रोजाना पाठन करें। साथ ही परिवार व समाज के लोगों को जांभाणी साहित्य भेंट करें जिससे आमजन को जांभोजी द्वारा सैंकड़ों साल पहले वर्तमान की विकट सामाजिक, आर्थिक व पर्यावरण संबंधी आपदाओं ने निपटने और बचाव के वैज्ञानिक तरीके बखान किए गए है। उन्होंने कहा कि भगवान जांभोजी ने सैंकड़ों वर्ष पूर्व पर्यावरण संरक्षण व जीव रक्षा का संदेश देते हुए अभियान चलाए थे जबकि उस वक्त किसी ने ऐसा नहीं सोचा था कि पर्यापरण प्रदुषण भी कोई वेश्विक समस्या है।


मुख्यवक्ता गणेेेेेेेेेशदत्त शर्मा ने कहा कि दुनिया में प्रत्येक बच्चा हिंदू ही जन्म लेता है और वह जिस घर में जन्म लेता है उसके संस्कारों के अनुसार ढल जाता है। जिसके बाद वह किसी जाती या धर्म का होकर रह जाता है। जिसका वर्णन धर्मग्रंथों में है। उन्होंने कहा कि जांभोजी साहित्य पढऩे उपरांत यह भी कहा जा सकता है कि जन्म लेने वाला बच्चा बिश्नोई होता और बाद में उसे वैसे संस्कारों की जरूरत है। जिसके लिए समाज में जांभोजी साहित्य का प्रचार प्रसार जरूरी है। उन्होंने बताया कि जांभोजी का साहित्य पंजाबी और उर्दू भाषाओं में होने के प्रमाण मिले हैं जिसकी खोज पाकिस्तानी व पंबाजी एरिया में की जानी चाहिए।

मुकाम गौशाला प्रधान सुलतान धारणीया व रोहताश आदमपुर ने कहा कि जीव रक्षा के लिए प्रत्येक व्यक्ति जागृत रहे। इसकी शुरुआत घर से करते हुए पक्षियों को चुग्गा डालें वहीं सार्वजनिक स्थानों पर सकोरा (जीव-जंतुओं व पक्षियों के लिए पानी रखने का पात्र) लगाकर जीव रक्षा करें। उन्होंनेे कहा कि युवावर्ग व वृद्धजन आगामी गर्मियों के समय में इसका अभियान चलाकर प्रत्येक जीव को भूख-प्यास से बचाएं। इसी प्रकार कुलदीप पूनियां व रमेश अबोहर ने कहा कि जांभोजी के साहित्य का जीवन में अनुसरण करें और जनहितैषी कार्य और समाजसेवा में बढ़चढ़कर हिस्सा लेें। पंबाज प्रदेश बिश्नोई सभा के प्रधान सुरेंद्र गोदारा ने कहा कि अकादमी की ओर से इंटरनेशनल कॉन्फ्रेस कराने का लक्ष्य रखा गया है ताकि विश्व को पर्यावरण संरक्षण का मार्ग जांभाणी साहित्य के अनुसार बताया जा सके।