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प्रतीत जी समचार लिजिए

8 वर्ष पहले
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चंडीगढ़. दवा के लिए आज तीमारदारों को मारे मारे घूमना पड़ा। क्योंकि दवा विक्रेता हड़ताल पर चले गए थे। इसके चलते लोगों को दवा की जबरदस्त किल्लत का सामना करना पड़ा। रोहतक पीजीआई हो या फिर जिला अस्पताल हर जगह मरीजों के परिजन दवा की पर्ची लिए यहां वहां भटकते देखे गए। ध्यान रहे आल इंडिया केमिस्ट एवं ड्रग एसोसिएशन ने सरकार की नीतियों को दवा विक्रेता विरोधी करार देते हुए १० मई को हड़ताल पर जाने का ऐलान किया था। इस वजह से प्रदेश मकें १५ हजार से अधिक दवा की दुकान पूरी तरह से बंद रही।


दोपहर बाद खुली कुछ दवा की दुकान
हालांकि दोपहर के बाद दवा की कुछ दुकान खुल गई थी। लेकिन इसके बाद भी हालात सामान्य नहीं हुए। अंबाला में रोशन लाल ने बताया कि उन्हें अपने बीमार भाई के लिए दवा चाहिए थी। लेकिन दवा नहीं मिली। एसोसिएशन के यमुनानगर जिला प्रधान मंजीत सिंह का कहना है कि १० साल के मेडीकल का अनुभव रखने वाले को फार्मासिस्ट का लाइसेंस मिलना चाहिए। सरकार ने चार से छह प्रतिशत रिटेल व दो प्रतिशत होल सेल में मार्जन को पूरा करना चाहिए। एफडीई उन पर लागू ने किए जाए।


ये आ रही है दिक्कत :
मंजीत सिंह ने बताया कि केमिस्ट की दुकानों पर फार्मासिस्ट की उपलब्धता एक चुनौती है। इसके पूर्ण निराकरण की मांग को लेकर संचालकों में जबरदस्त रोष है। इस समस्या के समाधान की मांग की जा रही है। ड्रग्स एवं कास्मेटिक्स एक्ट के संशोधन २००८ में बेगुनाह दवा विक्रेताओं को कानून की धारा के अंतर्गत राहत नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि विदेशी निवेश के दवा क्षेत्र में क्रय विक्रय के आगमन से २५ लाख परिवार तथा एक करोड़ से अधिक जनता प्रभावित हो रही है।


यहां पर मिली दवा
प्रधान ने बताया कि लोगों की सुविधा को देखते हुए अस्पताल में स्थित मेडीकल स्टोर खुले रहे। उनको इस हड़ताल से दूर रखा गया है। बीमारी व्यक्ति यहां से दवाई ले सकता है। वहीं सिविल सर्जन सतीश अग्रवाल का कहना है कि सरकारी इमरजेंसी २४ घंटे खुली है। किसी भी मरीज को दिक्कत नहीं आने दी गई।