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बंसल के अपनों ने जारी किया करोड़ों का लोन

8 वर्ष पहले
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चंडीगढ़। पवन बंसल अगर यह कहते हैं कि उन्होंने अपने परिवार के बिजनेस को आगे बढाने के लिए अपने सरकारी पद का दुरूपयोग नहीं किया तो यह कहना पहली ही नजर में सही नहीं दिख रहा है।
रेलवे मंत्री बनने से वित्त राज्य मंत्री रहते हुए बंसल परिवार की कंपनियों को कुछ बैंकों से बड़े लोन मिले जो शायद संभव नहीं होते।
बंसल जब 2006 से 2009 तक वित्त मंत्री थे, तो उसी समय उनके पारिवारिक चार्टर्ड एकाउंटेंट सुनील गुप्ता 2007 में कैनरा बैंक बैंक के नॉन ऑफिसियल डायरेक्टर बनाया गया।
वित्त राज्य मंत्री के हाथ में बैंकों के उच्च पदों की नियुक्तियां थीं अब संदेह और पुख्ता हो रहे हैं कि क्या पवन बंसल ने सुनील गुप्ता को कैनरा बैंक में उच्च पद तक पहुँचाने में कितनी मदद की।
गुप्ता कैनरा बैंक के साथ नवम्बर 23, 2007 से लेकर जुलाई 2010 तक नॉन ऑफिसियल डायरेक्टर रहे.जुलाई 27, 2010 के बाद वह शेयरहोल्डर डायरेक्टर बने. इसी समय कैनरा बैंक ने बंसल परिवार की कंपनियों को लोन दिए।
बंसल परिवार को करीब से जानने वाले कहते हैं कि सुनील गुप्ता बंसल परिवार के लम्बे समय तक विश्वासपात्र रहे और अब संदेह उठ रहा है कि थिओन फार्मा को जारी किए गए लोन को सेंक्शन करवाने के लिए ही सुनील गुप्ता की नियुक्ति कैनरा बैंक में कराई गई हो।
दैनिक भास्कर के पास मौजूद कागजात इस बात की तस्दीक करते हैं कि कैनरा बैंक में नॉन ऑफिसियल डायरेक्टर रहते हुए
यह मार्के की बात है कि सुनील गुप्ता थिओन फार्मा के भी सीए रह चुके थे। बैंक के शेयरहोल्डर डायरेक्टर बनने के कुछ महीने बाद ही वर्ष 2010 में कैनरा बैंक ने 20 करोड़ का लोन थिओन फार्मा को जारी कर दिया।
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कोट्स- सुनील गुप्ता, सीए
मेरी नियुक्ति में वित्त राज्य मंत्री को कोई हाथ नहीं था, बैंक ने भर्ती मेरिट पर की. बैंक ने भले ही बंसल की कंपनी को लोन जारी की हो लेकिन मेरे बैंक डायरेक्टर रहते बंसल परिवार की कंपनियों का जारी किये गए लोन में कोई सम्बन्ध नहीं था।
सतपाल जैन, नेता, बीजीपी
अब साबित करने को क्या रहा कि पवन बंसल ने अपने आधिकारिक पद का दुरूपयोग अपने पारिवारिक बिजनेस को आगे बढाने के लिए किया. रेल मंत्री को तुरंत अपने पद से इस्तीफा देकर जांच में सहयोग करना चाहिए।