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करौंथा आश्रम सौंपने के विरोध में भड़की भीड़ पुलिस फायरिंग में दो मरे

8 वर्ष पहले
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चंडीगढ़। करौंथा के सतलोक आश्रम में एक बार फिर खूनी खेल हुआ। संत को आश्रम की कमाने सौंपे जाने का विरोध कर रहे लोग हिसंक हो उठे। अक्रोशित भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी। इसमें दो लोगों की मौत हो गई। एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया।
आक्रोशित भीड़ ने रोडवेज की तीन बसें, एक एम्बुलेंस, पुलिसवालों की 26 मोटरसाइकिल और एक ठेका फूंक डाला। कई प्रेस फोटोग्राफरों से भी मारपीट की गई और उनके कैमरे तोड़ दिए। शाम 4.30 बजे समाचार लिखे जाने तक पुलिस और ग्रामीण आमने-सामने डटे हुए थे। मरने वालों की पहचान शाहपुर (पानीपत) के संदीप और करौंथा की प्रोमिला (40 वर्षीय) के रूप में हुई है।
दरअसल इस आश्रम का समाज का एक समुदाय पूरजोर विरोध कर रहा था। इसी को लेकर यहां कई बार झड़प हो चुकी है।
सात साल पहले संत रामपाल द्वारा महर्षि दयानंद पर कथित टिप्पणी करने के बाद से विवाद चल रहा है। 12 जुलाई 2006 में करौंथा के सतलोक आश्रम के बाहर बवाल होने पर झज्जर के युवक सोनू की मौत हो गई थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने 7 अप्रैल 2013 तक आश्रम को अपने कब्जे में रखा। इसके बाद गुपचुप तरीके से आश्रम संत रामपाल को सौंप दिया गया। इससे आक्रोशित आर्य समाजियों ने 9 अप्रैल को रोहतक-झज्जर हाईवे जामकर आश्रम खाली कराने की मांग की। करीब सात घंटे तक खींचतान के बाद प्रशासन ने रात डेढ़ बजे आश्रम को 30 अप्रैल तक दोबारा कब्जे में लेने का आश्वासन देकर जाम खुलवाया। लेकिन प्रशासन खाली नहीं करवा पाया तो आर्य समाजियों ने 12 मई को फिर प्रदर्शन की चेतावनी दी थी।
अपनी इसी चेतावनी पर अमल करते हुए आज भीड़ ने यह विरोध प्रकट किय। अभी तक भीड़ और पुलिस मौके पर जमी हुई है। इधर पुलिस ने
आर्य प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष आचार्य बलदेव सहित कई समर्थकों को हिरासत में ले लिया है।