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डाउनलोड करेंचंडीगढ़। रहस्य, रोमांच और पौरणिक यात्रा का दूसरा नाम है लाखामण्डल। महाभारत काल में दुर्योधन ने पाण्डवों को जला डालने के लिए लाक्षागृह बनाया था। तभी इस स्थान का नाम लाखामण्डल पड़ा। यमुना नदी के किनारे बसे लाखामण्डल का पूरा इलाका चारों तरफ से पहाड़ों से घिरा है।
छत्र शैली का बना मुख्य मंदिर चारों तरफ से सवा लाख शिवलिंगों से घिरा हुआ है। मंदिर के चारों तरफ शिवलिंग ही शिवलिंग नजर आते हैं। लाखामण्डल को पुरातत्व विभाग ने अपने संरक्षण में लिया हुआ है। लाखामण्डल में पाण्डवों के अज्ञातवास और लाक्षागृह की कहानी और सवालाख शिवलिंगों का संगम है।
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